ओम जैन
शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|अपने से अगर सम्मान या सेवा नही हो सकती तो कभी सन्तो की निंदा नही करनी चाइये क्योकि सन्तो की निंदा मतलब जिन शासन की निंदा होती है। ओर जिनशासन की रक्षा करना भी आप सभी का दायित्व है।
यह बात शांतिभवन सेन्थी में सोमवार को दूसरे दिन के प्रवचन के दौरान युवाचार्य महेंद्र ऋषि जी म.सा. ने कही।
उन्होंने कहा कि आजकल जितनी सेलेरी आती ईएमआई में चली जाती, जब परिस्थिति खराब आती है तो परेशानियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे ही पुण्य में होता जिसे हम सारा खर्च कर रहे लेकिन इकट्ठा कुछ नही कर रहे पुण्य कमा नही रहे तो भविष्य का क्या होगा।
युवाचार्य ने कहा साधु संत आपको वास्तविकता का भान करवाते है उनकी कही बात सुनकर हमे जीवन मे आने वाले संकटो से सावधान रहना है, जितनी हम फैसन की चीजें आभूषण पहनते सब बोझ है, पुण्य ही है जो जीवन को सफल बनाते है, इसलिए कुछ इकट्ठा ही करना तो इन फालतू की चीजो के बजाय पुण्य कमाओ ताकि भविष्य उज्ज्वल हो सके।
इससे पूर्व मेवाड़ भास्कर प्रवर्तक कोमल मुनि ने अपने प्रवचन में कहा कि वर्धमान परिवेश में जो जिंदगी जी रहे उसे देखकर हमे लगता है हम जीवन में साथ कुछ खास नही कर पाए, जीवन के लिए जो उपाय कर रहे उससे कुछ ज्यादा होने वाला नही है, हम कभी अहंकार में ना रहे और गुरु भगवंत की वाणी को आत्मसात करना है, पूर्ण विश्वास व आस्था के साथ आराध्य का ध्यान करना है, जैसे हमारे चहरे पर जो दाग हो जाए हमे खुद के हाथों से हटाने पड़ते, वैसे ही हम गुरु भगवंत में अनन्य भाव रखेंगे तभी जीवन मे सफल हो सकेंगे।
प्रवचन की शुरुआत में हर्षित मुनि जी म. सा. और उनके बाद महिमा श्री जी म. सा. ने जीवन के उद्धार को लेकर प्रवचन से लाभान्वित किया।
कार्यक्रम का संचालन संघ के कोषाध्यक्ष रतनलाल संजेती ने किया।
श्री संघ अध्यक्ष अनिल पोखरना ने बाहर से आये सभी अतिथियों का स्वागत किया। संघ मंत्री ओम जैन शंभूपुरा ने सभी धर्मप्रेमियों का धर्मसभा में पधारने पर आभार प्रकट किया।
