शाश्वत तिवारी
नेपीडॉ। स्मार्ट हलचल|भारत और म्यांमार ने दोनों देशों के बीच विकास सहयोग को और मजबूत करते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। म्यांमार की राजधानी नेपीडॉ में आयोजित एक विशेष समारोह में भारत सरकार की सहायता से संचालित होने वाली पांच ‘क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स’ (क्यूआईपी – त्वरित प्रभाव परियोजनाएं) के क्रियान्वयन के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन परियोजनाओं का प्राथमिक उद्देश्य म्यांमार के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में रहने वाले आम लोगों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना है।
म्यांमार स्थित भारतीय दूतावास ने एक बयान में कहा यह हस्ताक्षर समारोह म्यांमार के निवेश और विदेश आर्थिक संबंध मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री यू आंग क्याव होए और म्यांमार में भारतीय राजदूत अभय ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। भारत सरकार की ओर से इन समझौता ज्ञापनों पर दूतावास के प्रथम सचिव (विकास सहयोग) अमित श्रीअंश ने हस्ताक्षर किए, जबकि म्यांमार सरकार की तरफ से निर्माण मंत्रालय, होटल, पर्यटन व संस्कृति मंत्रालय, सूचना मंत्रालय और सहकारिता व ग्रामीण विकास मंत्रालय के संबंधित महानिदेशकों ने हस्ताक्षर किए।
दूतावास ने कहा इन पांच परियोजनाओं का मुख्य लक्ष्य म्यांमार के विभिन्न हिस्सों में क्षमता निर्माण, कौशल विकास, सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, मीडिया आउटरीच और सतत ग्रामीण विकास को मजबूती देना है। भारत सरकार ने म्यांमार के लोगों के लिए तात्कालिक आवश्यकता वाली इन पहलों को समर्थन देने के लिए अगले पांच वर्षों में 20 लाख अमेरिकी डॉलर तक की वित्तीय सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है।
इस तंत्र के तहत, भारत पिछले तीन वर्षों के दौरान यांगून क्षेत्र, नेपीडॉ, मांडले, तानिनथारी, सागाइंग, माग्वे, बागो क्षेत्र, शान राज्य और नागा स्व-प्रशासित क्षेत्र में नागरिक बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि, शिक्षा, हथकरघा, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सांस्कृतिक पुनरुद्धार जैसे क्षेत्रों में 12.5 लाख डॉलर की वित्तीय मदद पहले ही प्रदान कर चुका है।
बता दें कि भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत विभिन्न क्षेत्रों में म्यांमार की लगातार मदद करता रहता है। यह समझौता भारत की इस नीति के तहत म्यांमार के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।