अलीगढ़ थाना पुलिस पर ग्राम पंचायत बिलोता के सरपंच सहित अन्य आरोपियों को संरक्षण देकर पक्षपात के आरोप
टोंक/अलीगढ़ । स्मार्ट हलचल|उनियारा सर्किल के अलीगढ़ थाना क्षेत्र में एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। ग्राम पंचायत बिलौता से जुड़े कथित भ्रष्टाचार, गबन और अनियमितताओं के मामले में पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि जांच में दोषी पाए गए आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
परिवादी लोकेश मीणा (निवासी खेड़ली बालाजी) ने आरोप लगाते हुए बताया कि बिलोता पंचायत से जुड़े मामले में सरपंच (प्रशासक) सुरेश मीणा, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी जसराम मीणा-प्रथम और वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी जगमोहन मीणा सहित अन्य को प्रशासन की जांच में दोषी पाया जा चुका है। इसके बावजूद अलीगढ़ थाना पुलिस द्वारा संपर्क पोर्टल पर दर्ज एक परिवाद में कथित रूप से आरोपियों को बचाते हुए नियम विरुद्ध जवाब प्रस्तुत किया गया।
*जांच रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई नहीं*
परिवादी के अनुसार, उसने शिकायत के साथ सभी तथ्यात्मक साक्ष्य और संबंधित आदेश प्रस्तुत किए, लेकिन पुलिस ने उन्हें नजरअंदाज करते हुए उल्टा परिवादी को ही “विरोधी पक्ष” बताकर झूठी शिकायत करने का आरोप लगाया। इससे पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
*सरपंच को पदमुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू*
मामले में जिला परिषद टोंक के सीईओ परशुराम धानका द्वारा जांच उपरान्त पद का दुरूपयोग करने पर दोषी मानते हुए मुख्य आरोपी सरपंच (प्रशासक) सुरेश मीणा को पदमुक्त करने के लिए शासन सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग जयपुर को पद मुक्त का प्रस्ताव पारित करने को लेकर पत्र भी भेजा जा चुका है। इसके बावजूद पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
*पुलिस पर संरक्षण देने के आरोप*
परिवादी का आरोप है कि अलीगढ़ थाना पुलिस द्वारा नियमों के विपरीत कार्यवाही करते हुए दोषियों को संरक्षण दिया जा रहा है। इससे न केवल न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि आमजन का विश्वास भी डगमगा रहा है।
*मुख्य बिंदु*
जांच में दोषी पाए गए आरोपियों पर कार्रवाई नहीं, परिवाद रिपोर्ट पर पुलिस उपाधीक्षक उनियारा के मार्फत राजस्थान संपर्क पोर्टल पर झूठा जवाब पेश करने का आरोप, दोषियों पर कार्यवाही की बजाय उल्टे परिवादी को ही “विरोधी पक्ष” बताकर परेशान करने की शिकायत, प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के बावजूद पुलिस निष्क्रिय।
*उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग*
मामले को लेकर अब उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। परिवादी ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय की शरण लेकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा। जिसकी समस्त जिम्मेदारी व जवाबदेही प्रशासन की होगी। साथ ही परिवादी ने कहा कि न्याय में ईश्वर के घर देर हो सकती हैं, लेकिन अंधेर नहीं। अब देखना यह होगा कि आखिर पुलिस प्रशासन दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही कर पाता है या मामला न्यायालय की ओर बढ़ पाएगा।
