• ग्रामीणों का गंभीर आरोप: काम से बचने के लिए गांव से बाहर शिविर लगा रहे कर्मचारी
• लाखों के बजट का दुरुपयोग, बस स्टैंड के बजाय बाकरा चौराहे को बनाया आयोजन स्थल
✍️ अक्षय पारीक
खजूरी। स्मार्ट हलचल |सरकार की मंशा है कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को योजनाओं का लाभ मिले, लेकिन खजूरी पंचायत के कर्मचारी इस मंशा पर पानी फेर रहे हैं। उप तहसील मुख्यालय पर आयोजित घुमंतू एवं अद्धघुमंतु शिविर में प्रशासन की उदासीनता साफ नजर आई।
बस स्टैंड को छोड़ ‘बाहर’ जाने की क्या है मजबूरी?
ग्रामीणों ने बताया कि पहले सभी कैंप बस स्टैंड स्थित विद्यालय परिसर में लगते थे। वहां गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और मजदूर आसानी से पहुंच जाते थे। अब कर्मचारियों ने अपनी सुविधा के लिए 1 किमी दूर बाकरा चौराहे पर कैंप लगाना शुरू कर दिया है।
मुख्य मुद्दे और लापरवाही:
- प्रचार का अभाव: पंचायत द्वारा शिविर की कोई पूर्व सूचना या प्रचार-प्रसार नहीं किया गया।
- काम से जी चुराना: ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के बीच कैंप लगने पर काम करना पड़ता है, बाहर रहने पर कोई आता नहीं और हाजिरी लग जाती है।
- खबर का असर नहीं: 23 दिसंबर के कैंप की अव्यवस्था पर खबर छपने के बाद भी पंचायत अधिकारी मौन हैं।
“कैंप के नाम पर राज्य सरकार के लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन आम आदमी को कोई फायदा नहीं मिल रहा। यह सीधे तौर पर सरकारी धन की लूट है।” — स्थानीय ग्रामीण
मांग: ग्राम वासियों ने मांग की है कि अब होने वाले सभी कैंप अनिवार्य रूप से बस स्टैंड स्थित विद्यालय परिसर में ही आयोजित किए जाएं ताकि पात्र लोगों को लाभ मिल सके।













