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चाँद पर जाने कि जरूरत नहीं शम्भूपुरा चले जाइये..No need to go to the moon

खड्डे इतने बड़े कि गिरने वाला नजर तक नहीं आता कहा गया

जिम्मेदार आँखों मे काजल डाले बैठे, बड़े हादसे का कर रहे इंतजार।

ओम जैन

शम्भूपुरा। स्मार्ट हलचल/कहने को तो सरकारी महकमा आमजन और सार्वजनिक समस्याओ के समाधान के लिए होता है लेकिन लगता है शम्भूपुरा कस्बा इनके कवरेज से बाहर है और जनता ने जिन नेताओं को वोट देकर चुना है वो भी शम्भूपुरा को भूल गए जो वापस चुनाव के समय ही याद आएंगे।
शम्भूपुरा मे पिछले लम्बे समय से सडके पुरी तरह से खड्डो मे तब्दील हो चुकी ही यहाँ आये दिन लोग इन खड्डो मे गिर रहे करीब 2 दर्जन से अधिक लोग दुर्घटनाग्रस्त और घायल होकर अस्पताल पहुंच चुके है लेकिन अभी भी लगता है ग्राम पंचायत और संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे के इंतजार मे बैठा है कि किसी कि मौत कि खबर आ जाए तो फिर खड्डे भरवा देंगे।

खड्डे इतने बड़े कि गिरने के बाद आदमी भी नजर नहीं आता

छोटे मोटे खड्डे होना तो इस कस्बे मे आम बात है लेकिन पिछले कुछ समय से इन खड्डो मे बारिश का पानी भी भरा हुआ है और खड्डे इतने बड़े हो गए है कि इसमें गिरने के बाद कोई नजर तक नहीं आता कि आखिर गिरने वाला गया कहा।

आखिर कब आँखों से पट्टी हटाएंगे जिम्मेदार

कुम्भकर्णनीय नींद मे सो रहे जिम्मेदारो को कई बार जगाने का प्रयास लेकिन नेताओं को शायद यहाँ से वोट नहीं मिले और अधिकारियो को यहाँ काम करने कि तनख्वाह नहीं मिलती शायद इसीलिए कोई इस और ध्यान देने को ही तैयार नहीं स्थिति ऐसी गंभीर है कि पुरे कस्बे मे ना सिर्फ पंचायत बल्कि प्रधान, विधायक, सांसद और विभागीय अधिकारियो के खिलाफ आमजन मे खासा आक्रोश हो गया है।

कलेक्टर को ज्ञापन देकर रोड जाम कि दी चेतावनी

शम्भूपुरा कि सड़को कि बत्तर हालत और आये दिन हो रही दुर्घटनाओ के बाद भी जिम्मेदारो का नहीं चेतना ग्रामीणों को अब गंवारा नहीं है, ग्रामीणों ने कहा पानी अब सर से ऊपर आ गया है, ग्रामीणों ने सोमवार को जिला कलेक्टर को ज्ञापन देने कि बात कही और फिर भी सुनवाई नहीं होने पर मुख्य मार्ग जाम कर प्रदर्शन कि चेतावनी दी है।
ग्रामीणों कि इस गंभीर समस्या को लेकर हमने संबंधित विभाग के अधिकारियो और शम्भूपुरा ग्राम पंचायत के सरपंच से सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन किसी ने भी फोन उठाना जरुरी नहीं समझा, जिससे इनकी कार्यशेली पर भी सवालिया निशान लग रहा है।

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