बिलोता पंचायत में मृतकों के नाम नरेगा भुगतान का बड़ा खेल-एक के बाद एक गम्भीर फर्जीवाड़ों का खुलासा

मृत श्रमिकों के नाम फर्जी मस्टरोल, लाखों के गबन का आरोप-सरपंच व वीडीओ की भूमिका जांच के घेरे में

शिवराज बारवाल मीना
टोंक/उनियारा। स्मार्ट हलचल|जिले की उनियारा उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत बिलोता में नरेगा योजना के तहत भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। यहां मृत व्यक्तियों के नाम पर फर्जी तरीके से मस्टरोल भरकर भुगतान उठाने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में वर्तमान सरपंच (प्रशासक) सुरेश मीणा, ग्राम विकास अधिकारी जगमोहन मीणा सहित अन्य जिम्मेदारों की भूमिका संदेह के घेरे में है।
*मृतक के नाम पर उठाया गया भुगतान*
शिकायतकर्ता रामबाबू मीणा (खेड़ली) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रामदेव नामक व्यक्ति की मृत्यु 26 नवंबर 2024 को हो चुकी थी। इसके बावजूद 16 अप्रैल 2025 से 30 अप्रैल 2025 के बीच उसके नाम से मस्टरोल में फर्जी हाजिरी भरकर भुगतान उठा लिया गया।
*शोक में डूबे परिवार के नाम भी फर्जी एंट्री*
चौंकाने वाली बात यह है कि मृतक की मृत्यु के दिन और अगले दिन उसकी पत्नी रूपा देवी व पुत्र गिर्राज व पुत्रवधू रामपति देवी के नाम से भी उपस्थिति दर्ज कर भुगतान उठाया गया, जबकि परिवार शोक में था। जबकि सामाजिक रीति-रिवाजों के दौरान 12 दिन तक काम करना संभव नहीं होता, फिर भी रिकॉर्ड में काम दर्शाया गया।
*जॉब कार्ड व मस्टरोल में भारी गड़बड़ी*
जांच में जॉब कार्ड नंबर 69, 135 सहित कई मस्टरोल में अनियमितताएं सामने आई हैं। शिकायतकर्ता ने संबंधित दस्तावेज भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए हैं।
*फरवरी 2020 से अब तक के कार्यों की जांच की मांग*
शिकायत में 1 फरवरी 2020 से अब तक पंचायत के सभी आय-व्यय, मस्टरोल, वाउचर व विकास कार्यों का विशेष ऑडिट कराने की मांग की गई है। आरोप है कि कागजों में कार्य अधिक और जमीन पर कम दिखाई दे रहे हैं।
*पहले भी सामने आ चुका है मामला*
यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी रामजीलाल मीणा (मृत्यु 22 अगस्त 2016) के नाम पर दिसंबर 2021 में फर्जी मस्टरोल भरकर भुगतान उठाया गया था। लोकपाल व जिला परिषद जांच में सरपंच (प्रशासक) सुरेश मीणा को दोषी माना जा चुका है और उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
*अधिकारियों पर संरक्षण देने के आरोप*
आरटीआई में सामने आया कि सरपंच (प्रशासक) सुरेश मीणा को जांच में दोषी मानते हुए जिला परिषद टोंक से शासन सचिव एवं आयुक्त पंचायती राज विभाग जयपुर को 14 फरवरी 2026 को प्रशासक पद से कार्यमुक्त (हटाये जाने) का प्रस्ताव भिजवाया जा चुका हैं। वहीं तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी जसराम मीणा प्रथम व वर्तमान वीडीओ जगमोहन मीणा को भी दोषी मानते हुए 17 सीसीए नोटिस जारी किए गए हैं तथा निलंबन कार्यवाही जिला परिषद टोंक स्तर पर विचाराधीन हैं। इसके बावजूद कार्रवाई लंबित होने से जिम्मेदारों पर संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं।
*एफआईआर व वसूली की मांग*
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि आरोप सही पाए जाने पर सरपंच, वीडीओ व संबंधित मेट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सरकारी राशि की वसूली सहित विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए।
*प्रशासन पर टिकी निगाहें*
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सभी की नजर जिला प्रशासन पर है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह पंचायत स्तर पर बड़े भ्रष्टाचार का उदाहरण बन सकता है।