बनेड़ा: जिंदल सॉ लिमिटेड की अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ ग्राम जालिया और महुआखुर्द के किसानों का शांतिपूर्ण महापड़ाव आज 218वें दिन में प्रवेश कर गया है। इतने लंबे संघर्ष और राष्ट्रपति कार्यालय के हस्तक्षेप के बावजूद जिला प्रशासन की संवेदनहीनता से क्षुब्ध होकर अब किसानों ने जल्द हि जयपुर कूच करने का निर्णय लिया है। न्याय न मिलने से क्षुब्ध किसानों ने जयपुर का रास्ता अपनाते हुए महामहिम राज्यपाल से सामूहिक आत्मदाह की अनुमति मांगी थी।
मुख्य घटनाक्रम:
1. शांतिपूर्ण धरने की उपेक्षा: पिछले 218 दिनों से किसान लोकतांत्रिक तरीके से अपनी जायज मांगों को लेकर डटे हुए हैं, लेकिन प्रशासन ने समाधान के बजाय कंपनी को संरक्षण देना जारी रखा है।
2. जयपुर कूच की चेतावनी: न्याय न मिलने से हताश किसानों ने ऐलान किया है कि वे जल्द ही जयपुर की ओर प्रस्थान करेंगे और वहाँ अपनी मांगों को लेकर सामूहिक आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
3. गंभीर सुरक्षा उल्लंघन: ग्रामीणों का आरोप है कि रिहायशी इलाकों और स्कूलों के पास प्रतिबंधित ‘ड्राई ड्रिलिंग’ और भारी ब्लास्टिंग का दौर रुक नहीं रहा है। मकानों में दरारें और बच्चों के स्वास्थ्य पर संकट गहराता जा रहा है।
4. संवैधानिक आदेशों की अनदेखी: राष्ट्रपति सचिवालय के पत्र (Sl.No: P2/H/202506271710) और न्यायालय के आदेशों के बावजूद कार्यवाही न होना प्रशासन की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाता है।
5. DGMS की संदेहास्पद भूमिका: आंदोलनकारियों का कहना है कि DGMS ने सितंबर 2024 में बिना किसी भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के ब्लास्टिंग की अनुमति दे दी। पिछले 10 महीनों से जिला कलेक्टर के पत्रों का जवाब न देना विभाग की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
6. आबादी पर संकट: 500 मीटर के डेंजर ज़ोन में स्थित 3 बस्तियों और 3 सरकारी स्कूलों के पास हो रही भारी ब्लास्टिंग से मकानों में गहरी दरारें आ चुकी हैं। मासूम स्कूली बच्चों का जीवन हर पल खतरे में है।
किसानों का आह्वान:
किसान प्रतिनिधियों ने कहा है, “हमने शांति का रास्ता अपनाया, लेकिन हमारी चुप्पी को कमजोरी समझा गया। अब हमारी लड़ाई भीलवाड़ा की सड़कों से निकलकर राजधानी जयपुर तक पहुंचेगी। यदि कोई अनहोनी होती है, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी मुख्यमंत्री कार्यालय और भीलवाड़ा जिला प्रशासन की होगी।”













