राजस्थान।स्मार्ट हलचल|राजनीति हो या समाज, गलत का विरोध खुलकर करना चाहिए। रितिक शर्मा ने मीडिया के माध्यम से आमजन को संदेश देते हुए बताया कि अगर आप में गलत को गलत कहने की क्षमता नहीं है तो आपका जीवन व्यर्थ है, इतिहास हमेशा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वालों का लिखा जाता है, न कि सत्ता या अन्याय के तलवे चाटने वालों का। सत्य का साथ देना और गलत को गलत कहना, चाहे वह अपने हों या पराए, एक साहसी और सही नागरिक का धर्म है। क्योंकि अन्याय के खिलाफ मौन रहना भी एक तरह का अन्याय ही है।
*इतिहास गवाह है:* निडर होकर बोलने वाले लोग ही इतिहास में अमर होते हैं।
*अन्याय के खिलाफ आवाज:* समाज या राजनीति में जो भी गलत हो रहा है, उसे रोकने के लिए खुलकर बोलना जरूरी है।
*निडर बनें:* अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने में अपने या पराए का भेदभाव नहीं करना चाहिए।
*राजनीति से समाज में दुष्प्रभाव:*
एक साधारण नागरिक से लेकर बड़े व्यापारियों तक, राजनीति ने हर किसी के जीवन को नियंत्रित किया है। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में राजनीति का प्रवेश, धार्मिक संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप, और यहाँ तक कि व्यक्तिगत रिश्तों में भी राजनीति का प्रभाव देखा गया है। यह स्थिति समाज को उस बिंदु पर ले आई है, जहाँ नैतिक मूल्यों और समाज की भलाई की जगह राजनीतिक लाभ प्राथमिकता बन गए हैं।
*यह स्थिति समाज के लिए हानिकारक है:*
शर्मा ने बताया कि यह कहना भी गलत नहीं होगा कि समाज में राजनीति के प्रति बढ़ती ललक ने आम नागरिकों की सोच और प्राथमिकताओं को भी बदल दिया है। लोग अब किसी मुद्दे को सामाजिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय राजनीतिक चश्मे से देखने लगे हैं। इससे समाज में न केवल परस्पर विरोध बढ़ा है, बल्कि इसका प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार जैसे मूलभूत क्षेत्रों पर भी पड़ा है।
राजनीति के इस अति-महत्त्व ने समाज में ऐसा माहौल तैयार किया है, जहाँ हर मुद्दा राजनीतिक रंग ले लेता है। चाहे वह किसी प्राकृतिक आपदा का मुद्दा हो या फिर किसी सांस्कृतिक आयोजन का, राजनीति हर जगह हावी हो जाती है। यह स्थिति समाज के लिए हानिकारक है, क्योंकि यह लोगों के बीच सामंजस्य और सहयोग की भावना को खत्म करती है।










