27 अगस्त से प्रदेशव्यापी हड़ताल के बाद 2 सितंबर को हाईकोर्ट ने वापस लिया आदेश; चित्तौड़गढ़ में विजय जुलूस और आतिशबाजी, अध्यक्ष नरेश शर्मा बोले—यह पूरे राजस्थान के अधिवक्ताओं की जीत
चित्तौड़गढ़, स्मार्ट हलचल। न्याय की गुणवत्ता, निष्पक्ष सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय की Targeted Case Scheme (Phase-VI) के विरोध में प्रदेशभर के अधिवक्ताओं द्वारा शुरू किया गया आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। 27 अगस्त 2026 से जारी प्रदेशव्यापी हड़ताल और विरोध के बाद 2 सितंबर को संबंधित आदेश वापस लिए जाने की सूचना से चित्तौड़गढ़ सहित पूरे राजस्थान के अधिवक्ता समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई।इस आंदोलन में चित्तौड़गढ़ के अधिवक्ताओं की भूमिका भी प्रमुख रही। जिला अभिभाषक संस्थान, चित्तौड़गढ़ के अध्यक्ष अधिवक्ता नरेश शर्मा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने आंदोलन को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया और न्यायिक मामलों के निस्तारण में गुणवत्ता, निष्पक्ष सुनवाई तथा पक्षकारों के अधिकारों को प्राथमिकता देने की मांग उठाई।
अधिवक्ताओं का कहना था कि न्याय केवल मामलों की संख्या के आधार पर निस्तारण करने का विषय नहीं है, बल्कि प्रत्येक पक्षकार को निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण सुनवाई का अवसर मिलना जरूरी है। उनका तर्क था कि न्यायिक प्रक्रिया में गुणवत्ता और न्याय के मूल सिद्धांत किसी निर्धारित लक्ष्य से ऊपर होने चाहिए।
- 27 अगस्त 2026 से प्रदेशव्यापी विरोध और हड़ताल
- न्याय की गुणवत्ता और निष्पक्ष सुनवाई को लेकर विरोध
- 2 सितंबर को संबंधित आदेश वापस लिए जाने की सूचना
- 3 सितंबर को चित्तौड़गढ़ में विजय दिवस और विजय जुलूस
लगातार सात दिनों तक चले विरोध के बाद 2 सितंबर को Targeted Case Scheme से संबंधित आदेश वापस लिए जाने की सूचना सामने आई। इसके बाद चित्तौड़गढ़ के अधिवक्ताओं ने इसे अधिवक्ता एकता और न्याय की गुणवत्ता की रक्षा की महत्वपूर्ण जीत बताया।
विजय जुलूस निकालकर मनाया विजय दिवस
आदेश वापस लिए जाने के बाद जिला अभिभाषक संस्थान, चित्तौड़गढ़ की ओर से 3 सितंबर को विजय दिवस मनाया गया। न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं ने विजय जुलूस निकाला और आतिशबाजी कर जीत का जश्न मनाया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी तथा आंदोलन में सहयोग देने वाले सभी अधिवक्ताओं का आभार जताया।
जिला अभिभाषक संस्थान के अध्यक्ष अधिवक्ता नरेश शर्मा ने कहा कि यह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि राजस्थान के प्रत्येक अधिवक्ता की जीत है। उन्होंने आंदोलन के दौरान चित्तौड़गढ़ के अधिवक्ताओं की एकजुटता और सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
नरेश शर्मा ने कहा कि चित्तौड़गढ़ की आवाज राजस्थान में मजबूती से गूंजी। जब न्याय की गुणवत्ता और निष्पक्ष सुनवाई का सवाल सामने आया तो चित्तौड़गढ़ के अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और निष्पक्ष बनाए रखना था।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं और न्याय की गुणवत्ता अथवा निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित होने की आशंका वाले विषयों पर अपनी बात रखना उनका दायित्व है।
बड़ी संख्या में अधिवक्ता रहे मौजूद
विजय जुलूस में जिला अभिभाषक संस्थान के अध्यक्ष नरेश शर्मा, उपाध्यक्ष चांदनी बैरागी, सचिव लोकेन्द्र सिंह राणावत, सहसचिव विशाल सिंह भाटी, कोषाध्यक्ष कमलेश सुखवाल, पुस्तकालय प्रभारी रोहित खटीक सहित संदीप सेठिया, गिरीश दीक्षित, संस्थान के पूर्व अध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में अधिवक्तागण मौजूद रहे।
विजय जुलूस के दौरान अधिवक्ताओं में खासा उत्साह नजर आया। नारेबाजी, आतिशबाजी और मिठाई वितरण के बीच अधिवक्ताओं ने आंदोलन की सफलता पर खुशी जताई। अधिवक्ताओं ने कहा कि 27 अगस्त से 2 सितंबर तक चला यह संघर्ष अधिवक्ता एकता और न्याय की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों को लेकर राजस्थान के अधिवक्ता आंदोलन में महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
