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हमारे आदरणीय देवता मानव शरीर में बने कमलों में ही विराजमान हैं संत रामपाल जी महाराज

कृष्णकुमार राजपुरोहित

एकदिवसीय सत्संग भीनमाल में आयोजित हुआ

स्मार्ट हलचल|भीनमाल फ़ाफ़रिया हनुमान जी मंदिर मेंआयोजित एक दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग में संत रामपाल जी महाराज जी ने बहुत ही गूढ़ रहस्य आध्यात्मिक ज्ञान उजागर किया है। उन्होंने सुक्ष्म वेद का हवाला देते हुए समझाया कि देवताओं को बाहर ढूंढने की आवश्यकता नहीं है वे हमारे शरीर के भीतर बने कमलों (चक्रों) में ही विराजमान है।
मानव शरीर को पवित्र शास्त्रों में “जीवित मंदिर” कहा गया है। जिसको पाने के लिए स्वर्ग के देवता भी तरसते है, क्योंकि मोक्ष का द्वार मानव शरीर ही है। इस मंदिर के भीतर अनेक कमल स्थित हैं—मूल कमल से लेकर सहस्रार कमल तक। इन कमलों को प्रथम मंत्र की साधना द्वारा खोला जाता है।
संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं कि जब तक पूर्ण गुरु (तत्वदर्शी संत) से नाम दीक्षा लेकर विधिवत साधना नहीं की जाती, तब तक इन कमलों का रहस्य समझ में नहीं आता
संत रामपाल जी महाराज जी के अनुसार, अधूरी साधना मनुष्य को केवल भ्रम में रखती है, जबकि पूर्ण तत्वज्ञान आत्मा को उसके वास्तविक घर सतलोक की ओर ले जाता है। जब साधक गुरु मर्यादा में रहकर नाम-सुमिरन करता है, तब धीरे-धीरे शरीर के अंदर स्थित कमल खुलते है।

आज लाखों श्रद्धालु संत रामपाल जी महाराज जी के बताए सतमार्ग पर चलकर नशामुक्त, दहेजमुक्त और नैतिक जीवन अपना रहे हैं। उनके सत्संग न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाते हैं, बल्कि सामाजिक सुधार का भी सशक्त माध्यम बन रहे हैं।

यह कहना गलत नहीं होगा कि तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देवता की खोज बाहर मंदिरों में नहीं, भीतर करनी है। हमारे शरीर के कमलों में विराजमान परमात्मा को पहचानकर ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य पूर्ण हो सकता है सत्संग में अजयराम, रामजीराम, भावेश भाई दहिया, तेजाभाई पुरोहित, छोगाराम माली, दानाराम माली, पुखराज सेन, पारस, गोपीदास, जुठाराम, मंसाराम रानीवाड़ा, जैसादास, कानदास, अजयदास, जानवी, योगिता, एवनदास, उषा, माया, नीता, पारो, शांति, पवनी, शांतिदास, मोहिनी, मतरा एवं संत श्री रामपालजी महाराज के भीनमाल एवं आसपास ग्रामीण क्षेत्रों के अनुयाई मौजूद थे!

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