Homeअंतर्राष्ट्रीयपाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान से चीन तक 'कीमती' पत्थरों की तस्करी करने...

पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान से चीन तक ‘कीमती’ पत्थरों की तस्करी करने की कोशिश, तालिबान ने किया गिरफ्तार

जानकारी के मुताबिक जिन चट्टानों की तस्करी हो रही थी उनमें 30 फीसदी तक लिथियम के तत्व होते हैं। ये चट्टान पाकिस्तान की सीमा के साथ सटे अफगान प्रांतों नूरिस्तान और कुनार से चोरी-छिपे निकाले गए थे।

जानें पूरा मामला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अफगान टेलीविजन चैनलों द्वारा रविवार को प्रसारित टिप्पणियों में तालिबान के खुफिया अधिकारियों ने कहा कि चीनी नागरिक और उनके अफगान सहयोगी अवैध रूप से पाकिस्तान के रास्ते चीन में कीमती पत्थरों का परिवहन करने की योजना बना रहे थे। चीन और अफगानिस्तान के बीच संबंध 12 दिसंबर के बाद से खराब हो गए हैं जब एक होटल को निशाना बनाकर किए गए बम और बंदूक के हमले में पांच चीनी नागरिक घायल हो गए थे।इस हमले के कारण बीजिंग का ढुलमुल रवैया सामने आया क्योंकि चीन ने अपनी सलाह में नागरिकों को अफगानिस्तान छोड़ने के लिए कहा।

लिथियम वाले पत्थरों की तस्करी

स्थानीय मीडिया रिपोर्टरली के अनुसार, ये गिरफ्तारी पूर्वी अफगानिस्तान के एक सीमावर्ती शहर जलालाबाद में हुई है। जानकारी के मुताबिक जिन चट्टानों की तस्करी हो रही थी उनमें 30 फीसदी तक लिथियम के तत्व होते हैं। ये चट्टान पाकिस्तान की सीमा के साथ सटे अफगान प्रांतों नूरिस्तान और कुनार से चोरी-छिपे निकाले गए थे। तालिबान के खुफिया अधिकारियों ने स्थानीय मीडिया से बताया कि ये दोनों चीनी नागरिक अपने अफगान सहयोगियों के साथ इन कीमती कीमती पत्थरों को अवैध रूप से पाकिस्तान के रास्ते चीन ले जाने की योजना बना रहे थे।

तालिबान ने लगा रखा है प्रतिबंध

आपको बता दें कि अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी और नाटो सैनिकों के निकलने के बाद से तालिबान ने लिथियम के निष्कर्षण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। अफग़ानिस्तान में कथित तौर पर 1 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के दुर्लभ खनिज हैं। इनमें से लिथियम के विशाल भंडार भी शामिल हैं, लेकिन दशकों के युद्ध ने अफगान खनन के विकास को रोक दिया है। आपको बता दें कि लिथियम रिचार्जेबल बैटरी में एक प्रमुख घटक है और इसका उपयोग जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में किया जाता है, जिससे इस धातु की वैश्विक मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है। फिलहाल काबुल स्थित चीनी दूतावास ने अभी तक इस मसले पर कुछ नहीं कहा है।

चीन और अफगानिस्तान के रिश्ते

हालांकि, पिछले साल नवंबर में, अफगानिस्तान चीन के साथ प्राचीन सिल्क रोड व्यापार मार्गों को पुनर्जीवित करने के लिए अपनी घटती अर्थव्यवस्था की मदद करने के लिए बातचीत कर रहा है। लेकिन लगता है कि अफगानिस्तान की भी वही योजना थी जो चीन की थी। 15 अगस्त 2021 को, जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया, तो चीन ने जमीन से घिरे देश को मैत्रीपूर्ण सहयोग प्रदान करने की अपनी तत्परता व्यक्त की। चीनी विदेश मंत्रालय भी अफगानिस्तान में रचनात्मक भूमिका निभाने का इरादा रखता है। अल अरेबिया पोस्ट के अनुसार, वास्तव में चीन, पाकिस्तान, रूस और ईरान की तरह तालिबान शासन के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में उभरा था।

आपको बता दें कि आर्थिक संकट से जूझ रही तालिबानी सरकार ने एक चीनी कंपनी के साथ मिलकर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय करार किया है। तालिबान ने अमु दरिया बेसिन से तेल निकालने के लिए एक चीनी कंपनी के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। ये चीनी कंपनी पहले साल तेल और गैस ब्लॉकों का पता लगाने के लिए करीब 150 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी। इसके बाद अगले 3 सालों के लिए कंपनी 540 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी।

यूक्रेन को अरबों डॉलर की सैन्य सहायता देने का वादा ,रूस ने दी जर्मनी को अंजाम भुगतने की धमकी

RELATED ARTICLES
- Advertisment -