रोहित सोनी
आसींद । भीषण गर्मी के दौर में जगलों में वन्य जीवों के लिए पीने के पानी की कमी होने लगी है,पानी की कमी से व्याकुल वन्यजीवों की आवाजाही अब आबादी क्षेत्रों में बढ़ने लगी है ऐसे में रविवार देर रात को पांडरू गांव में एक पैंथर कार के सामने आ गया कार चालक ने पैंथर का वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिया पैंथर के आने से ग्रामीणों में भी दहशत हैं,ऐसे में वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए अलर्ट जारी किया है… हालांकि वन विभाग के कर्मचारी अपने स्तर पर सारी व्यवस्था कर रहे हैं…. फिर भी भीषण गर्मी के चलते जंगली जानवर अब आबादी क्षेत्र में जा रहे है…
वन विभाग ने ग्रामीणों को चेताया है कि पानी की कमी के चलते वन्यजीवों की आवाजाही आबादी क्षेत्र की और बढ़ रही है……सावधान रहें…….पानी की कमी होने के कारण आसपास स्थित पशु बांधने के बाडों के आसपास चौकसी बढ़ावें और विशेष रूप से चौकसी रखें…….विगत दिनों आसींद कटार चिताम्बा बरसनी करेड़ा के जंगल में एक दर्जन पैंथर का मूवमेन्ट दिखा गया है……. हालांकि वन विभाग सभी जगह पिंजरा लगाकर पैंथर को पकड़ रहा है…फिर भी क्षेत्र में पैंथर की संख्या अधिक होने के कारण
सभी पैंथर जंगल से आबादी क्षेत्र की और जा रहे है……. और इसके पीछे की वजह सिर्फ और सिर्फ पानी है……मालूम हो कि वर्तमान में भीषण गर्मी का दौर जारी है…… तापमान की बात करे तो..47 डिग्री पहुंच चुका है…..जंगली क्षेत्र में वन्य जीवों के पीने के पानी की कमी हो रही है…….पानी के स्त्रोत सूख चुके हैं……ऐसे में जंगल में विचरण करने वाले हिंसक वन्य जीव अब पानी के कारण आबादी क्षेत्र में मूवमेंट करना शुरू कर दिया है.
ऐसे में इन हिंसक जगंली जानवरों से पालतू पशुओं और आमजन के लिए भी खतरा बढ़ रहा है…..यह जंगली जानवर रात के समय पालतू पशुओं के बाडों में घुसकर उनका शिकार करते हैं……वन विभाग ने अपने अलर्ट में आमजन को सर्तक और सावधान रहने की चेतावनी दी है……
राजस्थान सरकार भी लगातार स्थानीय प्रशासन को चाहे एसडीएम हो या ग्राम विकास अधिकारी वन्य जीव और पशुओं के लिए दाना पानी की व्यवस्था करने के लिए पाबंद किया हुआ है…फिर भी कई क्षेत्र ऐसे है जहां पानी की स्थानीय प्रशासन व्यवस्था नहीं करवा पा रहा है….. स्मार्ट हलचल भी दर्शकों से अपील करता है की जहां जंगली जानवरों का आना-जाना हो और वहां पानी की कमी हो तो स्थानीय प्रशासन या वनविभाग के अधिकारी या सरपंच तक जानकारी पहुंचाए….. ताकि जंगली जानवर के लिए जंगल में ही पानी की व्यवस्था की जा सके।













