कोविड टीकाकरण में पताराकलां गांव ने मारी बाजी

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प्रधान, एएनएम व आंगबाड़ी के साझा प्रयासों से गांव बना नंबर वन

आशीष त्रिपाठी/अश्वनी त्रिपाठी

सीतापुर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों, ग्राम प्रधान और अधिकारियों के साझा प्रयासों से कसमंडा ब्लॉक का पताराकलां गांव कोविड टीकाकरण में बाजी मारने में कामयाब रहा है। जिले के विभिन्न विकास खण्डों (ब्लॉक) में चलाए जा रहे विशेष टीकाकरण अभियान के तहत कसमंडा ब्लॉक को भीक्लस्टर में बांट कर ग्रामीणों का टीकाकरण किया जा रहा है। इस अभियान के तहत इस गांव के 886 लोगों में से 508 लोगों को टीका लगाया जा चुका है। इस सफलता के पीछे कसमंडा सीएचसी अधीक्षक सहित एएनएम, आंगनबाड़ी, ग्राम प्रधान और ग्रामीणों की भूमिका सराहनीय रही है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. पीके सिंह का कहना है कि कसमंडा सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरविंद बाजपेयी योजनाबद्ध तरीके से गांव में टीकाकरण करा रहे हैं। पताराकलां गांव को टीकाकरण में नंबर एक बनाने में एएनएम शोभा शुक्ला, रजनी बाला, आशा, उर्मिला मिश्रा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कलावती, गिरजावती, ग्राम प्रधान नफीस के अलावा ग्रामीण गुड्डू भारती और विजय मिश्रा का सराहनीय योगदान रहा है। यह सभी लोग ग्रामीणों में टीकाकरण को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर कर उन्हें जागरूक करने का काम कर रहे हैं।
ग्राम प्रधान नफीस का कहना है कि ग्रामीणों में भ्रम था कि कोरोना का टीका लगवाने से वह बीमार हो जाएंगे, इसलिए लोग टीकाकरण के लिए नहीं आ रहे थे। गांव में 31 मई को कैंप लगा तो बहुत समझाने पर 32 लोग टीका लगवाने को राजी हुए। इसके बाद गांव के कुछ और लोगों को लेकर ग्रामीणों को जागरूक करना शुरू कर दिया, लोगों को समझाया जिसका परिणाम यह रहा कि गांव में जब दोबारा कैंप लगा तो 54 लोगों ने टीका लगवाया और इसके बाद 24 जून और 25 जून को गांव में लगे कैंप में क्रमश: 255 और 167 लोगों ने कोरोना से बचाव का टीका लगवाया। उन्होंने बताया कि वह स्वयं 24 जून को यह टीका लगवा चुके हैं। सीएचसी अधीक्षक . अरविंद बाजपेयी ने बताया कि जब स्वास्थ्य कर्मियों और डॉ. ग्रामीणों की बात लोग नहीं मानते हैं, तो ग्राम प्रधान, ग्रामीणों और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मैं स्वयं गांव वालों के बीच जाकर उन्हें समझाता हूं। उनकी शंकाओं का समाधान कर उन्हें टीके का महत्व बताते हुए टीका लगवाने के लिए प्रेरित करता हूं।

पताराकलां गांव की तस्वीर —
आयुवर्ग — चिन्हित ग्रामीण — लाभांवित ग्रामीण
18-44 साल — 516 — 330
44 साल से अधिक — 370 — 178
कुल ग्रामीण — 886 — 508।

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