भाजपा के सियासी समीकरणों को निर्दलीयों ने दिया बड़ा झटका, 39 वार्डों में परचम; सभापति की राह भी साफ

अशोक पाठक गुट के टिकट कटने से नाराज निर्दलीयों ने बदला चुनावी गणित, भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी राजेश्वरी गुर्जर को वार्ड 31 में वंदना सिंघल ने हराया; 42 पार्षदों के समर्थन से विजय कुमारी चतुर्वेदी का निर्विरोध सभापति बनना तय होने का दावा

हिण्डौन सिटी, स्मार्ट हलचल, मदन मोहन गर्ग। नगर परिषद चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद हिण्डौन की राजनीति में बड़ा उलटफेर दिखाई दे रहा है। चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले निर्दलीय प्रत्याशियों ने कई वार्डों में मजबूत प्रदर्शन करते हुए प्रमुख दलों के सियासी समीकरण बिगाड़ दिए। चुनाव परिणाम के बाद सामने आए दावों के अनुसार 60 में से 39 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों का परचम रहा है। ऐसे में नगर परिषद में बोर्ड बनाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
चुनाव से पहले भाजपा में टिकट वितरण को लेकर नाराजगी का असर परिणाम में भी दिखाई दिया। अशोक पाठक गुट से जुड़े समर्थकों के टिकट कटने के बाद बड़ी संख्या में बागी होकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे थे। इनमें से कई प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों को ही चुनौती दे दी। परिणाम ने भाजपा के पुराने सियासी समीकरणों को झटका दिया है।
वार्ड 31 में भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी को निर्दलीय ने हराया
सबसे चर्चित मुकाबलों में वार्ड 31 का परिणाम रहा। यहां भाजपा ने राजेश्वरी गुर्जर को अधिकृत प्रत्याशी बनाया था। उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी वंदना सिंघल ने शिकस्त देकर चुनाव जीत लिया। राजेश्वरी गुर्जर को सभापति पद के संभावित दावेदारों में भी माना जा रहा था। ऐसे में उनकी हार से भाजपा के भीतर सभापति पद को लेकर बनाए जा रहे समीकरणों को बड़ा झटका माना जा रहा है।
निर्दलीयों के हाथ में बोर्ड की चाबी
60 सदस्यीय नगर परिषद में निर्दलीयों की बड़ी संख्या के कारण अब बोर्ड गठन में उनकी भूमिका निर्णायक हो गई है। चुनाव परिणाम के बाद सामने आए आंकड़ों के मुताबिक 39 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत बताई जा रही है। यदि यह आंकड़ा अंतिम रूप से सही रहता है तो भाजपा और कांग्रेस के लिए बहुमत का रास्ता निर्दलीयों के समर्थन के बिना आसान नहीं होगा।
सूत्रों के अनुसार निर्दलीय पार्षदों ने भी अपनी ताकत को समझते हुए नेतृत्व के सामने शर्तें रखना शुरू कर दिया है। भाजपा की ओर से निर्दलीय पार्षदों को साधने और अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिशों के बीच निर्दलीयों का एक बड़ा धड़ा अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है।
42 पार्षदों के समर्थन से विजय कुमारी चतुर्वेदी का नाम आगे
वहीं, सभापति पद को लेकर भी नया सियासी समीकरण सामने आया है। विजय कुमारी चतुर्वेदी के पक्ष में 42 पार्षदों का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में उनके निर्विरोध सभापति बनने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति आधिकारिक प्रक्रिया और सभी आवश्यक औपचारिकताओं के बाद ही स्पष्ट होगी।
भाजपा के सामने बड़ी चुनौती
भाजपा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने अधिकृत पार्षदों के साथ निर्दलीय विजेताओं को अपने साथ लाने की है। वहीं निर्दलीय पार्षदों की संख्या अधिक होने से वे भी बोर्ड गठन में अपनी भूमिका और हिस्सेदारी को लेकर मजबूत स्थिति में हैं। चुनाव परिणाम ने यह साफ कर दिया है कि इस बार हिण्डौन नगर परिषद में पार्टी के बजाय निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विधानसभा चुनाव में 60 हजार मतों से पराजित प्रत्याशी को संगठन और सत्ता में कमजोर करने की मांग को लेकर निर्दलीय खेमा भी सक्रिय बताया जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में हिण्डौन की स्थानीय राजनीति में नए शक्ति केंद्र उभरने के संकेत मिल रहे हैं।