प्लास्टिक के कप में परोस रहे चाय:सिंगल यूज प्लास्टिक का धड़ल्ले से उपयोग,सरकारी दावे कागजों तक सिमटे

मुकेश खटीक
मंगरोप।एक ओर सरकार सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है।हमीरगढ़ नगर पालिका क्षेत्र,मंगरोप सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में चाय की थड़ियों और छोटी दुकानों पर सिंगल यूज प्लास्टिक का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है।चाय,पानी और अन्य पेय पदार्थ प्लास्टिक के डिस्पोजेबल कपों में परोसे जा रहे हैं,जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।स्थानीय हालात यह हैं कि प्रतिदिन सैकड़ों प्लास्टिक कप इस्तेमाल में लाए जाते हैं और उपयोग के बाद इन्हें खुले में फेंक दिया जाता है।यह प्लास्टिक कचरा नालियों,सड़कों और खेतों में फैलकर न केवल गंदगी बढ़ा रहा है,बल्कि मवेशियों और आमजन के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनता जा रहा है।कई बार मवेशी इस प्लास्टिक कचरे को खा लेते हैं,जिससे उनकी जान तक खतरे में पड़ जाती है।सरकार द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए नियम-कानून बनाए गए हैं।साथ ही समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाने और कार्रवाई के निर्देश भी जारी होते रहते हैं,लेकिन स्थानीय स्तर पर इन नियमों की प्रभावी पालना नहीं हो पा रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद दुकानदार लागत और सुविधा का हवाला देकर प्लास्टिक का ही उपयोग कर रहे हैं।प्रशासनिक अमला कभी-कभार कार्रवाई करता जरूर है,लेकिन वह भी औपचारिकता तक सीमित रह जाती है।कुछ दिनों बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं।हमीरगढ़ के पर्यावरण प्रेमियों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाए।चाय की थड़ियों और दुकानों पर नियमित निरीक्षण हो,नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाया जाए और कुल्हड़,कांच व स्टील जैसे पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए।पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने बताया कि प्लास्टिक के कप में चाय पीने से चर्म रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।उन्होंने लंबे समय से सिंगल यूज प्लास्टिक बंद करने की मांग करते हुए लोगों को कांच और स्टील के गिलास में चाय पीने की सलाह दी है।उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए,तो आने वाले समय में इसके दुष्परिणाम पूरे क्षेत्र को भुगतने पड़ेंगे।