जिला अस्पताल बना “नाम का”, मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़!

डॉक्टरों की कमी से शाहपुरा बेहाल, इलाज के नाम पर सन्नाटा
कांग्रेस का प्रशासन पर तीखा वार, सौंपा राज्यपाल के नाम ज्ञापन
शाहपुरा-मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल|शाहपुरा का जिला चिकित्सालय इन दिनों “नाम बड़ा और दर्शन छोटे” की कहावत को चरितार्थ करता नजर आ रहा है। यहां इलाज के नाम पर सन्नाटा पसरा है और मरीजों को राहत के बजाय निराशा ही हाथ लग रही है। इसी गंभीर हालात को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी एवं नगर कांग्रेस कमेटी शाहपुरा ने शुक्रवार को जोरदार विरोध दर्ज कराते हुए उपखण्ड अधिकारी को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष महावीर कुमावत और नगर कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सेन के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में अस्पताल की बदहाल स्थिति को लेकर तीखी नाराजगी जताई गई। कांग्रेस नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि शाहपुरा को भले ही जिला अस्पताल का दर्जा मिल गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत में यह सुविधा “शून्य” के आसपास ही सिमटी हुई है।
ज्ञापन में बताया गया कि अस्पताल में सबसे जरूरी जनरल फिजिशियन और सोनोग्राफी के लिए रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को प्राथमिक जांच और इलाज तक के लिए भटकना पड़ रहा है। हालत यह है कि वृद्ध पेंशनधारक, गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीज घंटों लाइन में लगने के बाद भी बिना इलाज के लौटने को मजबूर हैं।
डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मरीजों को मजबूरी में करीब 50 किलोमीटर दूर भीलवाड़ा जाना पड़ रहा है। कई मरीज आर्थिक तंगी के चलते वहां तक नहीं पहुंच पाते और उनकी बीमारी दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि प्रशासन की लापरवाही का भी स्पष्ट प्रमाण है।
कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अगर समय रहते डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई तो हालात और बिगड़ेंगे। उन्होंने मांग की कि तत्काल प्रभाव से जनरल फिजिशियन और रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति कर अस्पताल की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। साथ ही चेतावनी भी दी गई कि यदि 10 दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ब्लॉक एवं नगर कांग्रेस कमेटी शाहपुरा द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
शाहपुरा की जनता अब सवाल पूछ रही है जब अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं, तो “जिला चिकित्सालय” का दर्जा आखिर किस काम का?