पंचायत चुनाव में कांग्रेस ने केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध को बनाया चुनावी हथियार, जुबानी प्रहार जारी

जयपुर: कांग्रेस पार्टी की पंचायत चुनाव में कोशिश है कि केंद्रीय कृषि कानून को किसानों के बीच में ले जाकर बीजेपी के खिलाफ चुनावी हथियार बनाया जाए. पंचायत चुनाव में चल रहे चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता लगातार कृषि कानूनों पर हमला बोल रहे. कृषि अध्यादेशों के खिलाफ देशभर में कांग्रेस ने आंदोलन भी किए थे. दूसरी ओर बीजेपी मुद्दा बना रही है बिहार की जीत को.

केन्द्र के तीन कृषि कानूनों को चुनावी हथियार बनाया:  
निकाय और पंचायत चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस ने केन्द्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुंकार भर दी थी. कोरोना के चलते सड़क पर विरोध अधिक नहीं हो पाया लेकिन राजस्थान में विधानसभा आहूत कर के और केंद्र के फैसलों के खिलाफ बिल लेकर कांग्रेस ने मंतव्य जता दिया. पंचायती राज के चुनावों में बीजेपी को घेरना और बीजेपी की किसानों के बीच छवि धूमिल करना. इसी कड़ी मे कांग्रेस ने धरने, प्रदर्शन , वर्चुअल रैली भी की. बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान को कांग्रेस ने किसानों कें बीच चलाया, माना जा रहा है कि राजस्थान में 10 लाख से अधिक हस्ताक्षर किए गए. अब पंचायत चुनावों में कांग्रेस ने केन्द्र के तीन कृषि कानूनों को चुनावी हथियार बनाया है. कुछ किसान संगठन भी आवाज बुलंद कर रहे हैं. पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को उम्मीद है कि पंचायत चुनाव में कांग्रेस को अच्छी सफलता मिलेगी किसान वर्ग केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जनादेश देगा.

प्रदर्शन के पीछे किसान वोट बैंक बड़ा करना रहा:
कृषि कानूनों को लेकर विरोध प्रदर्शन के पीछे किसान वोट बैंक बड़ा करना रहा. पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव में कांग्रेस के नेता कृषि कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताकर बीजेपी को घेर रहे हैं. इन मुद्दों के जरिए कांग्रेस किसान वर्ग की सहानुभूति बंटोरकर उन्हें अपने पाले में लाना चाहती है. किसान राजनीति से ओत प्रोत माने जाते हैं कुछ प्रमुख जिले. कुछ प्रमुख किसान संगठनों ने भी कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रखी है कांग्रेस को उम्मीद है कि इससे भी उन्हें लाभ मिलेगा.

नागौर: 
– नागौर को किसान राजनीति का गढ़ माना जाता है
– विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली
– किसान नेता नाथूराम मिर्धा की धरती कही जाती है

सीकर: 
– किसान राजनीति का बड़ा केंद्र सीकर माना जाता है
– पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा यही से आते हैं
– विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सीकर की सभी विधानसभा सीटों पर फतेह प्राप्त की पंचायत चुनाव में भी शेखावाटी के इस केंद्र पर कांग्रेस को भरोसा

झुंझुनूं:
– शीशराम ओला और रामनारायण चौधरी जैसे कद्दावर किसान नेता या जन्मे
– बिहार की राजनीति में कांग्रेस का बोलबाला रहा
– चौधरी हरलाल सिंह जैसे विराट किसान नेता की धरती कही जाती है
– विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां सभी सीटें जीती
– मंडावा का उपचुनाव भी कांग्रेस ने जीता अब नजरें पंचायत चुनाव पर

चूरू:
– किसान राजनीति का एक प्रमुख केंद्र
– नरेंद्र बुडानिया सरीखे प्रमुख किसान नेता कांग्रेस के पास
– देहात में कांग्रेस को अच्छे परिणामों की उम्मीद
– हालांकि बीते कुछ सालों में भाजपा नेता मजबूती प्राप्त की है भाजपा ने कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी है

बीकानेर: 
– किसान राजनीति की प्रमुख गढ़ के तौर पर विख्यात
– कांग्रेस को यहां इतिहास में कॉमरेड से मिलती थी चुनौती
– अब भाजपा ने भी पैर पसार लिए हैं
– किसान नेता रामेश्वर डूडी यहां बड़े किसान क्षत्रप
– यहां कांग्रेस को कॉमरेड वर्ग से भी संघर्ष करना पड़ेगा

कांग्रेस को पंचायत चुनाव में बड़े अच्छे परिणामों की उम्मीद है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है पंचायत चुनाव में पार्टी को अच्छी सफलता मिलेगी. राजस्थान में सामंती और जमीदारी प्रथा के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा कर कांग्रेस पार्टी ने इस वर्ग के बीच अपनी पैठ बनाई थी. समय-समय पर भैरों सिंह शेखावत और वसुंधरा राजे ने किसानों के बीच पनपे हुए कांग्रेसी तिलिस्म को तोड़ने का काम किया, इसके लिए उन्हें कांग्रेस के ही कद्दावर किसान नेताओं को आयात करना पड़ा था और बीजेपी में लाना पड़ा,जाहिर है सफलता भी मिली. अब केंद्रीय कृषि कानून के खिलाफ राजस्थान के नहरी और प्रमुख किसान बेल्ट में विरोध को कांग्रेस पंचायत चुनाव में हथियार बनाए हुए हैं.

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