पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन

भीलवाड़ा । पुलिस मित्र संगठन, नई दिल्ली भारत की जिला इकाई भीलवाड़ा द्वारा आज राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित कर पुलिस विभाग में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मानसिक, सामाजिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया गया। ज्ञापन में पुलिसकर्मियों के बढ़ते मानसिक तनाव, अवसाद, आत्महत्या की घटनाओं एवं पारिवारिक विघटन जैसी समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से योग, ध्यान, मनोवैज्ञानिक परामर्श, काउंसलिंग एवं समय-समय पर मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण जैसी योजनाएं लागू करने की मांग की गई।

ज्ञापन में बताया गया कि पुलिस सेवा अत्यधिक तनावपूर्ण एवं चुनौतीपूर्ण कार्य क्षेत्र है, जहां लंबे समय तक ड्यूटी, सामाजिक दबाव, अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी, पारिवारिक दूरी, अपर्याप्त अवकाश एवं संसाधनों की कमी के कारण अनेक पुलिसकर्मी मानसिक अवसाद (Depression), चिंता विकार (Anxiety Disorders), अनिद्रा (Insomnia) एवं मानसिक थकान (Burnout Syndrome) जैसी गंभीर समस्याओं से ग्रसित हो रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया कि मानसिक रूप से अस्वस्थ पुलिसकर्मी न केवल स्वयं प्रभावित होता है, बल्कि उसकी कार्यक्षमता, निर्णय क्षमता एवं पारिवारिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

संगठन ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गरिमामय जीवन एवं मानसिक स्वास्थ्य का अधिकार प्राप्त है तथा राज्य का यह दायित्व है कि वह अपने कर्मचारियों को सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराए। ज्ञापन में “Mental Healthcare Act, 2017” की भावना के अनुरूप पुलिसकर्मियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देने की मांग भी की गई।

ज्ञापन में पुलिस विभाग हेतु कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए, जिनमें प्रत्येक पुलिस लाइन, थाना एवं जिला स्तर पर नियमित योग, प्राणायाम, मेडिटेशन एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना, “Police Mental Wellness & Counselling Cell” की स्थापना करना, तनाव प्रबंधन (Stress Management Program) लागू करना, ड्यूटी के घंटों में संतुलन एवं पर्याप्त अवकाश सुनिश्चित करना, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइन प्रारंभ करना प्रमुख रूप से शामिल हैं।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि पुलिसकर्मियों के पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन को सुदृढ़ बनाने हेतु समय-समय पर परिवार परामर्श शिविर एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे पुलिसकर्मियों को भावनात्मक सहयोग मिल सके। साथ ही विभागीय अधिकारियों को भी संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई गई।

पुलिस मित्र संगठन ने मांग की कि राज्य सरकार द्वारा पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण हेतु नियमित मेडिकल जांच एवं “मेंटली फिट पुलिस अभियान” प्रारंभ किया जाए, जिससे तनावग्रस्त पुलिसकर्मियों की समय रहते पहचान कर उनका उपचार एवं पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके। संगठन ने कहा कि स्वस्थ एवं मानसिक रूप से सशक्त पुलिस बल ही समाज में कानून व्यवस्था को प्रभावी रूप से बनाए रख सकता है।

इस अवसर पर एडवोकेट लक्ष्मी, एडवोकेट मुकेश शर्मा प्रदेश अध्यक्ष विधि प्रकोष्ठ, एडवोकेट मुकेश कुमार सुथार, गौरव गुर्जर, सोशल एक्टिविस्ट गोटू सिंह मंगलपुरा, एडवोकेट परीक्षित शर्मा, शरद कुमार शुक्ला, रिंकू तंवर, सचिन शर्मा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार द्वारा इस विषय पर गंभीरता से कार्य किया जाता है तो पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी तथा समाज में बेहतर कानून व्यवस्था स्थापित करने में सहायता मिलेगी। अंत में संगठन ने राज्य सरकार से पुलिस जवानों के मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण हेतु शीघ्र ठोस नीति बनाने की मांग की।