थानेदार जी! आपके थाने के सामने से गुजर रहा बजरी का ‘काला कारोबार’, फिर भी कार्रवाई का इंतजार!

बाकरा में GPS कैमरे ने खोली निगरानी व्यवस्था की पोल? शाम 7:19 बजे बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली कैमरे में कैद, शकरगढ़ थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जहाजपुर अलकेश पारीक

स्मार्ट हलचल|शकरगढ़ थाना क्षेत्र क्षेत्र में बजरी का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ बाकरा गांव में बुधवार शाम 7 बजकर 19 मिनट पर GPS Map Camera से बनाए गए वीडियो में बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली नजर आ रही है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर शकरगढ़ थाना पुलिस की निगरानी व्यवस्था कितनी मुस्तैद है?स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में बजरी की कोई वैध लीज नहीं है। इसके बावजूद बजरी से भरे वाहनों की आवाजाही की शिकायतें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि वाहन भरनी केसरपुरा नाके की ओर से बजरी भरकर खजूरी होते हुए शकरगढ़ थाना क्षेत्र से गुजरते हैं और पुलिया पार कर बूंदी जिले की तरफ निकल जाते हैं।

थानेदार जी, आखिर किस बात का इंतजार है?

जब बजरी से भरे वाहन थाना क्षेत्र के रास्तों से गुजरने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो फिर इनकी जांच और रोकथाम के लिए ठोस कदम क्यों नजर नहीं आ रहे? क्या संबंधित मार्गों पर रात्रिकालीन गश्त हो रही है? क्या संदिग्ध वाहनों के परिवहन दस्तावेजों की जांच की जा रही है? या फिर अवैध बजरी कारोबारियों को रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?

सबसे बड़ा सवाल थानेदार साहब की कार्यप्रणाली पर है।क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों की शिकायतें और वीडियो सामने आने के बावजूद यदि प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही, तो पुलिस प्रशासन को इसकी वजह स्पष्ट करनी चाहिए। हालांकि, वीडियो में ट्रैक्टर-ट्रॉली दिखाई देना अपने आप में बजरी के अवैध होने का अंतिम प्रमाण नहीं है; इसकी पुष्टि जांच से होनी चाहिए।

अखबारों में खबरें, कैमरे में वाहन—फिर भी कार्रवाई कब?

अवैध बजरी परिवहन को लेकर पहले भी खबरें प्रकाशित होने की बात सामने आई है। अब GPS कैमरे में दर्ज समय और लोकेशन के आधार पर संबंधित वाहन की पहचान करना तथा उसके परिवहन दस्तावेजों की जांच करना पुलिस और खनन विभाग के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

यदि संबंधित क्षेत्र में वैध लीज नहीं है, तो बजरी का स्रोत क्या है? वाहन किस स्थान से बजरी लेकर आया? क्या उसके पास वैध रॉयल्टी और परिवहन दस्तावेज हैं? इन सवालों की जांच कर सच्चाई सामने लाना जरूरी है।

पुलिस अधीक्षक और खनन विभाग से कार्रवाई की मांग

मामले में जिला पुलिस अधीक्षक और खनन विभाग को वीडियो की जांच करवाकर संबंधित मार्गों पर निगरानी बढ़ानी चाहिए। यदि अवैध परिवहन की पुष्टि होती है, तो वाहन संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में लापरवाही हुई है या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

अब सवाल सीधा है—शकरगढ़ थाना पुलिस अवैध बजरी परिवहन रोकने के लिए मैदान में उतरती है या फिर ऐसे ही वीडियो सामने आते रहेंगे और बजरी के वाहन रास्तों से गुजरते रहेंगे?

*थानेदार साहब, जनता जवाब चाहती है—कार्रवाई कब होगी?*