सुनील बाजपेई
कानपुर। स्मार्ट हलचल|पुलिस की लापरवाही अब उन लोगों को भी भारी पड़ रही है ,जिनके परिजन हत्या के रूप में मौत का शिकार बन चुके हैं। जिसका ज्वलंत उदाहरण है महाराजपुर में अवैध संबंधों के शक में हत्या का शिकार बनाई गई विवाहिता का मामला। उसके शव का पोस्टमार्टम घटना के तीन दिन बाद आज सोमवार को किया गया। उसकी तीन दिन पहले उसके पति ने गला दबाकर हत्या कर दी थी।
कुल मिलाकर हत्या के इस मामले में मामले में पुलिस की एक बड़ी लापरवाही देखने को मिली। घटना के तीसरे दिन पुलिस ने मृतका श्वेता का पोस्टमार्टम कराया, इस दौरान बॉडी डिकंपोज होने लगी।
जानकारी देते हुए मृतका के चचेरे भाई आशीष सिंह ने बताया कि उन्होंने पुलिस से पंचायतनामा भरने की बात कही, तो पुलिस ने शहर में वीआईपी मूवमेंट में हवाला दिया और रविवार देर शाम पंचायतनामा भरकर भेजा, लेकिन देर होने के कारण पोस्टमार्टम नहीं सका ,जिससे परिजन पूरे दिन भटकते रहे।
इस दौरान गाजीपुर के मोहनपुर गांव निवासी श्वेता की मां ऊषा देवी ने कहा कि हत्यारोपी सचिन झूठ बोल रहा था कि बेटी के साथ कमरे में लड़के मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सचिन व उसके परिजन दहेज में 10 लाख रुपए की मांग करते थे। दहेज न देने पर सचिन ने परिजनों के साथ मिलकर बेटी को मौत के घाट उतार दिया। ऊषा ने बताया कि सचिन उनकी बेटी को खाने तक के लिए मोहताज रखता था।
मृतका की मां ने बिलखते हुए बताया कि बेटी चोरी छिपे उन्हें इंस्टाग्राम के जरिए कॉल करती थी। दामाद सचिन हम लोगों से बात करने को मना करता था, 10 जनवरी को बेटी से बात करने पर सचिन ने श्वेता की बेरहमी से पिटाई की थी।
याद रहे की 3 दिन पहले अवैध संबंधों में शक में सचिन ने पत्नी श्वेता की गला दबाकर हत्या कर दी थी। पत्नी की हत्या की इस घटना को अंजाम देने के बाद उसने महाराजपुर थाने में आत्म समर्पण भी कर दिया था, जिसके बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है। घटना वाले दिन सचिन ने पुलिस को जो बयान दिया था। उसके मुताबिक उसने अपनी पत्नी श्वेता को दो लड़कों के साथ चारपाई पर बैठे हुए देखा थाजिसको लेकर ही विवाद होने के बाद उसने इस घटना को अंजाम दिया था।













