पोटलां। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में 6 दिन में 5 मौतों का मामला तुल पकड़ता नजर आ रहा है प्रसूता के परिवारजनों, ग्रामीणों, समाजजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा मामले को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। पोटलां कस्बे की रहने वाली 30 वर्षीय प्रसूता संगीता जीनगर पत्नी जितेंद्र जीनगर की हुई संदिग्ध मृत्यु के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस दुःखद घटना से व्यथित परिजनों और ग्रामीणों ने आज सोमवार को भीलवाड़ा पहुँचकर जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
“दो मासूमों के सिर से उठा माँ का साया”
मृतका के परिजनों ने बताया कि संगीता की मृत्यु के बाद उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। संगीता अपने पीछे दो छोटे बच्चों को छोड़ गई है—एक 2 साल का बेटा और महज 5 दिन की नवजात बेटी। इन मासूमों के सिर से माँ का साया उठ जाने से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, पोटलां निवासी जीनगर समाज की बेटी संगीता जीनगर को प्रसव के लिए सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच महात्मा गांधी चिकित्सालय लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी डॉक्टरों ने करीब चार घंटे तक उसे भर्ती नहीं किया और लापरवाही बरतते रहे। बाद में समाज के जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप और फोन करने के बाद शाम करीब 6 बजे प्रसूता को भर्ती किया गया। इसके बाद चिकित्सकों ने परिजनों पर ऑपरेशन का दबाव बनाया, जिस पर परिजनों ने सहमति दे दी। मृतका की ननद सानू जीनगर ने बताया कि पहले ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने गर्भाशय (बच्चे दानी) के दूसरे ऑपरेशन की बात कही। ऑपरेशन के बाद प्रसूता को होश नहीं आया और उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई। आरोप है कि अस्पताल में फैले इन्फेक्शन और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण संगीता ने दम तोड़ दिया। समाज के प्रतिनिधि गौरव जीनगर ने चेतावनी दी है कि चिकित्सालय प्रशासन और डॉक्टरों की इस घोर लापरवाही के खिलाफ यदि शीघ्र ही सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो पूरे राजस्थान में जीनगर समाज द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा।
“परिजनों का आरोप लापरवाही से गई जान”
मृतका के देवर हरीश जीनगर ने आरोप लगाया कि प्रसूता की मौत के पीछे चिकित्सालय प्रशासन की गंभीर लापरवाही है। उन्होंने कहा कि स्टाफ गंभीर नहीं होने के कारण संगीता भाभी ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जाँच कराने की पुरजोर मांग की है ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े।
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में परिजनों ने प्रसूता की मृत्यु के कारणों की गहनता से जाँच व घटना के लिए जिम्मेदार चिकित्सा कर्मियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उन पर कानूनी कार्यवाही की जाए।
आर्थिक सहायता
मृतका के दो छोटे बच्चों के भविष्य को देखते हुए सरकार द्वारा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। प्रतिनिधित्व कर रहे गौरव जीनगर ने बताया कि सिलसिलेवार 5 मौत का होना सरकार की अनदेखी और चिकित्सा विज्ञान की घोर लापरवाही है जो मानवीय मूल्यों पर सवालियां निशान है
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में न्यायपूर्ण कार्यवाही नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में परिवारजन, समाजजन, ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
