उपखंड न्यायालय भवानीमंडी का ऐतिहासिक निर्णय: साढ़े अठारह बीघा बहुमूल्य भूमि पुन: श्रीराम मंदिर के नाम दर्ज की गई

रणवीर सिंह चौहान

स्मार्ट हलचल/उपखंड न्यायालय भवानीमंडी ने एक महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए कस्बा पचपहाड़ स्थित ऐतिहासिक ‘श्रीराम मंदिर’ की बहुमूल्य भूमि को पुन: मंदिर के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। राजस्व रिकॉर्ड में हुई एक गंभीर लिपिकीय त्रुटि के कारण पिछले पांच दशकों से अधिक समय से यह भूमि पुजारी परिवार के नाम दर्ज चली आ रही थी, जो राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के विधिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन था।

यह विवाद वर्ष 2011 में न्यायालय के समक्ष आया, जब संबंधित पुजारी परिवार एवं वर्तमान खातेदारों में से एक पक्ष ने वाद प्रस्तुत किया। प्रार्थी पक्ष ने ग्राम मांडवी स्थित कुल 18 बीघा 8 बिस्वा (साढ़े अठारह बीघा) भूमि को पुन: ‘श्रीराम मंदिर पचपहाड़’ के स्वामित्व में दर्ज करने का आग्रह किया था।

लोक अदालत द्वारा इस भूमि को मंदिर के नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया था, किंतु द्वितीय पक्ष द्वारा अपीलीय न्यायालय में चुनौती दिए जाने के कारण प्रकरण पुन: उपखंड न्यायालय भवानीमंडी को प्रेषित कर दिया गया। लंबे समय से लंबित चल रहे इस मामले को ‘मंदिर माफी’ की भूमि से संबद्ध होने के कारण न्यायालय द्वारा अत्यंत संवेदनशीलता व गंभीरता से लिया गया।

प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों और तहसीलदार पचपहाड़ द्वारा प्रेषित विस्तृत जांच रिपोर्ट के सूक्ष्म अवलोकन से यह तथ्य सिद्ध हुआ कि यह भूमि मूल रूप से ‘खाता मुआफियत’ के अंतर्गत ‘मंदिर श्री राम जी पचपहाड़’ के नाम दर्ज थी।

न्यायालय ने माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्णयों का उल्लेख करते हुए रेखांकित किया कि राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों और न्यायालयों का यह परम विधिक दायित्व है कि वे नाबालिगों, दिव्यांगों और ‘देवता’ के हितों की अटूट रक्षा करें। कानूनन, देवता को एक ‘शाश्वत नाबालिग’ माना गया है, जो राज्य के विशेष संरक्षण के पात्र हैं।

02 जून, 2026 को ऐतिहासिक निर्णय पारित करते हुए उपखंड अधिकारी सुश्री श्रद्धा गोमे ने न केवल भूमि को मंदिर के नाम दर्ज करने का निर्देश दिया, बल्कि भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए इस भूमि को किसी भी व्यक्ति द्वारा विक्रय अथवा हस्तांतरित किए जाने पर कानूनी रूप से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस निर्णय का स्थानीय जनता और श्रद्धालुओं ने व्यापक स्वागत किया. यहां यह उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी भवानी मंडी उपखंड अधिकारी श्रद्धा गोमे द्वारा मेला मैदान तथा शिवालय मंदिर भूमि में ऐतिहासिक निर्णय दिए हैं