एजाज़ अहमद उस्मानी
स्मार्ट हलचल|मेड़ता रोड में प्राइवेट बस संचालकों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू किए जाने से आमजन का जनजीवन प्रभावित हो गया है। हड़ताल के चलते शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए संचालित होने वाली निजी बसें पूरी तरह बंद रहीं, जिससे यात्रियों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
सुबह से ही बस स्टैंड पर सन्नाटा पसरा रहा। रोजाना नौकरी, व्यापार, पढ़ाई और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आने-जाने वाले लोग बसों के इंतजार में खड़े नजर आए, लेकिन बस सेवाएं बंद होने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ा। कई यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा, जिससे उनका समय और पैसा दोनों अधिक खर्च हुआ।
*टेंपो चालकों की चांदी, यात्रियों की जेब पर बोझ*
बसों के बंद रहने का सीधा फायदा टेंपो चालकों को मिला। यात्रियों का आरोप है कि टेंपो चालकों द्वारा सामान्य किराए से कहीं अधिक राशि वसूली जा रही है। जहां पहले 20 से 30 रुपये में तय होने वाला किराया अब 50 से 80 रुपये तक वसूला जा रहा है। मजबूरी में यात्रियों को अधिक किराया देकर सफर करना पड़ रहा है।
कुछ यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि हड़ताल के दौरान वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था की जाए और किराए पर नियंत्रण रखा जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके।
*हड़ताल का कारण*
बताया जा रहा है कि प्राइवेट बस संचालकों ने विभिन्न मांगों को लेकर यह हड़ताल शुरू की है। हालांकि, आधिकारिक रूप से उनकी प्रमुख मांगों की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार टैक्स, परमिट और अन्य प्रशासनिक मुद्दों को लेकर असंतोष जताया जा रहा है।










