सूरौठ में बंदरों ने 3 वर्षीय बालिका को किया जख्मी नहीं थम रहा बंदरों का आतंक, प्रशासन मौन

सूरौठ में बंदरों ने 3 वर्षीय बालिका को किया जख्मी नहीं थम रहा बंदरों का आतंक, प्रशासन मौन

सूरौठ। कस्बे में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की ओर से उत्पाती बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण लोगों में भय व्याप्त है। कस्बे में मरघट तिराहे के पास बंदरों ने एक 3 वर्षीय बालिका पर हमला बोल कर घायल कर दिया। उत्पाती बंदर पिछले 6 महीने में काफी लोगों को जख्मी कर चुके हैं। इसके बावजूद भी प्रशासन ने बंदरों को पकड़ने के मामले में बिल्कुल गंभीरता नहीं दिखाई है।
कस्बे में मरघट तिराहे के पास के निवासी विजय गौड की 3 वर्षीय पुत्री प्रियांशी गौड अपने घर के आंगन में खेल रही थी। इसी दौरान बंदरों के झुंड ने बालिका प्रियांशी गौड पर हमला बोल दिया। घर में मौजूद अन्य लोगों ने हाथों में लाठी लेकर बड़ी मुश्किल से बालिका प्रियांशी को बंदरों से छुड़ाया। बंदरों ने बालिका को जख्मी कर दिया। घायल बालिका को परिजनों ने अस्पताल में भर्ती करवाया। कस्बा सूरौठ के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेबीज इंजेक्शन नहीं होने के कारण परिजनों ने हिंडौन के राजकीय अस्पताल में पहुंच कर रेबीज वैक्सीन लगवाई। कस्बे में बंदरों की घायल करने की आए दिन घटनाएं होने के बावजूद भी यहां के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में काफी समय से रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है जिसके कारण मरीजों को हिंडौन पहुंचकर रेबीज इंजेक्शन लगवाना पड़ रहा है। कस्बे में बंदरों को पकड़वाने की मांग को लेकर यहां के लोग कई बार विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। इसके अलावा कस्बा वासियों को बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजीव शुक्ला के नेतृत्व में शिष्टमंडल जयपुर में राज्य के वन मंत्री से भी मिल चुका है। वन मंत्री संबंधित अधिकारियों को बंदरों को पकड़वाने के निर्देश भी दे चुके हैं लेकिन अभी तक कस्बे के लोगों को बंदरों के आतंक से निजात नहीं मिली है। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने इस मामले में जल्द ही गंभीरता नहीं दिखाई तो बंदरों की वजह से बड़ा हादसा घटित हो सकता है।

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