टोंक घंटाघर पर आंदोलन: दूसरे दिन भी अनशन जारी-प्रशासन बेखबर-आरटीआई में टेंडर घोटाले का बड़ा खुलासा

शिवराज बारवाल मीना
टोंक। स्मार्ट हलचल|शहर के घंटाघर पर किसान महापंचायत के बैनर तले चल रहा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन दूसरे दिन गुरूवार को भी जारी रहा। किसान महापंचायत युवा प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद चौधरी के नेतृत्व में धरनार्थियों ने रात भी खुले आसमान के नीचे गुजारते हुए प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष जताया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि लगातार विरोध के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई सुध नहीं ली है।
*आरटीआई में खुलासा: बिना पुलिस चौकी के ही जारी कर दिया टेंडर*
अनिश्चितकालीन धरने के दौरान सामने आए आरटीआई खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। जानकारी के अनुसार, कार्यालय पुलिस अधीक्षक टोंक से प्राप्त आरटीआई में स्पष्ट हुआ कि निवाई नगर पालिका क्षेत्र में कोई पुलिस चौकी स्थापित ही नहीं है। इसके बावजूद कृषि उपज मंडी समिति निवाई में “रिपेयरिंग टू पुलिस चौकी” के नाम पर 0.99 लाख रुपये का टेंडर जारी कर दिया गया।
*सचिव पर आरोप: भांजे को नियमों के विरुद्ध टेंडर*
धरनार्थियों का आरोप है कि मंडी सचिव कमल किशोर सोनी ने नियमों की अनदेखी करते हुए अपने ही भांजे शुभम सोनी को यह टेंडर दे दिया। इस कार्य में 90,060 रुपये की एम.बी. भी दर्ज की गई, जिस पर स्वयं सचिव के हस्ताक्षर हैं। जिस कमरे को पुलिस चौकी बताया गया, वह मात्र 10 गुणा 12 फीट का जनरेटर रूम है और उसे आधिकारिक नक्शे में पुलिस चौकी के रूप में चिन्हित भी नहीं किया गया।
*प्रशासन की चुप्पी पर सवाल*
मामले की जानकारी जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया है कि आखिर प्रशासन सचिव के सामने कमजोर क्यों नजर आ रहा है।
*कानून की अनदेखी का आरोप*
राजस्थान सार्वजनिक खरीद पारदर्शिता अधिनियम-2013 की धारा 81(2)(घ) के तहत नजदीकी रिश्तेदारों को टेंडर देना प्रतिबंधित है, इसके बावजूद नियमों को दरकिनार कर यह टेंडर जारी किया गया।
*मजदूरी दर में हेरफेर का भी आरोप*
धरनार्थियों ने आरोप लगाया कि मंडी में मजदूरी दर को लेकर भी व्यापारियों के हित साधे गए।
वर्ष 2024 में तय 6.08 रुपये की मजदूरी दर को कथित रूप से दस्तावेजों में बदलाव कर हटाया गया। वर्ष 2025 में इसे घटाकर 3.50 रुपये कर दिया गया, जिससे मजदूरों और किसानों को नुकसान हुआ।
*किसानों को नुकसान: अधिक वजन वसूली का मामला*
किसान महापंचायत के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि मंडी में 50 किलो जिंस पर 300 ग्राम अतिरिक्त वजन लिया जा रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। शिकायत के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
*स्वास्थ्य परीक्षण तक नहीं*
अनशन के दूसरे दिन भी प्रशासन द्वारा धरनार्थियों का कोई स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया गया, जिसे आंदोलनकारियों ने गंभीर लापरवाही बताया है। कुल मिलाकर टोंक का यह मामला अब प्रशासनिक निष्क्रियता, नियमों की अनदेखी और किसानों के साथ कथित अन्याय का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।