श्रमिक संगठनों का प्रदर्शन श्रमिक संगठनों ने फूंका मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला

, कलेक्ट्रेट पर चस्पा किया राष्ट्रपति के नाम मांगपत्र
सीटू सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों ने निकाली रैली, 42 हजार रुपये न्यूनतम वेतन और श्रम संहिताएं वापस लेने की उठाई मांग
भीलवाड़ा, 23 अक्टूबर। स्मार्ट हलचल|बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और श्रमिक विरोधी नीतियों के विरोध में शुक्रवार को भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने शहर में प्रदर्शन किया। मुखर्जी पार्क में एकत्रित हुए श्रमिकों ने रैली निकालकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुप्ता का पुतला दहन किया। इस दौरान श्रमिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की और केंद्र सरकार की नीतियों के प्रति आक्रोश जताया।
प्रदर्शन के बाद श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन देने का प्रयास किया, लेकिन जिला कलेक्टर के उपलब्ध नहीं होने पर श्रमिकों को ज्ञापन नहीं सौंपा जा सका। इसके बाद प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने राष्ट्रपति के नाम तैयार मांगपत्र को जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार पर चस्पा कर दिया और वापस लौट गए।
श्रमिक संगठनों ने कहा कि देश का श्रमिक वर्ग बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण, ठेका प्रथा, श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव और दमनकारी नीतियों के कारण गंभीर संकट से गुजर रहा है। मजदूरों की मेहनत से देश की अर्थव्यवस्था चलती है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल जैसी बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त रूप से नहीं मिल रही हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि गिरफ्तार किए गए सभी श्रमिकों और कार्यकर्ताओं को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए तथा उनके खिलाफ दर्ज कथित झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं। श्रमिक विरोधी श्रम संहिताओं को वापस लेकर ट्रेड यूनियनों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता की जाए और भारतीय श्रम सम्मेलन का आयोजन किया जाए। श्रमिकों ने न्यूनतम वेतन 42 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने, आठ घंटे का कार्यदिवस लागू करने तथा अतिरिक्त कार्य के लिए दोगुना ओवरटाइम भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।
ज्ञापन में संविदा एवं ठेका श्रमिकों को समान काम के लिए समान वेतन और सभी वैधानिक सुविधाएं देने के साथ नियमितीकरण की मांग की गई। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण करने, रसोई गैस सस्ती उपलब्ध कराने तथा सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) और भविष्य निधि (पीएफ) का लाभ सुनिश्चित करने की मांग की गई। श्रमिक संगठनों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने और श्रमिक आंदोलनों पर दमन बंद करने की भी अपील की।
प्रदर्शन में सीटू के प्रदेश सचिव ओमप्रकाश देवाणी, टेक्सटाइल यूनियन के सोनू शर्मा, गणेश लाल गहलोत, नरेंद्र मराठा, मोतीलाल राजवीका, जिला अध्यक्ष अनीता कंवर, टीना कर, शमीम, पिंकी सेन, हेमलता गर्ग, सरिता, नंदकुमार, रेखा कंवर, बरजी देवी सहित कई श्रमिक शामिल हुए। जिला बिल्डिंग वर्कर्स यूनियन से रतनलाल नट और जोरा बानो तथा जिला मिड-डे मील श्रमिक यूनियन से महिला श्रमिकों ने भी भाग लिया। इनमें मोदी देवी, नर्मदा, विमला देवी, चंपा देवी, अनुराधा, निर्मला, बैरेट, मंजू, गीता देवी, सुशीला, सरोज, लक्ष्मी कुमार, शेफाली और शकीरा बानो सहित अन्य श्रमिक मौजूद रहे।
श्रमिक संगठनों ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि देश के करोड़ों मेहनतकश मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उनकी मांगों पर तत्काल सकारात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन, आर्थिक सुरक्षा और उनके अधिकारों के अनुरूप सुविधाएं मिल सकें।