स्मार्ट हलचल| अखिल राजस्थान योग प्रशिक्षक महासंघ (रजि.) के आह्वान पर हजारों आयुर्वेद योग प्रशिक्षकों ने शहीद स्मारक, जयपुर में सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। महासंघ के प्रदेश संरक्षक डॉ. बी. एल. कुमावत ने कहा कि योग प्रशिक्षकों ने राजस्थान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि वही योग प्रशिक्षक आज स्वयं आर्थिक बदहाली का जीवन जीने को मजबूर हैं।उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत नियुक्त पार्ट टाइम योग प्रशिक्षक पिछले 4–5 वर्षों से मात्र 5,000 से 8,000 रुपये मासिक मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। महंगाई के इस दौर में इतने कम वेतन में परिवार का पालन-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। कई महिला योग प्रशिक्षकों को रोज़ाना 40–45 किलोमीटर तक आवागमन करना पड़ता है, फिर भी उन्हें न तो स्थायी सेवा सुरक्षा मिली है और न ही फुल टाइम वेतनमान।डॉ. कुमावत ने कहा कि आयुर्वेद योग प्रशिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर, विधायक, मंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं मुख्यमंत्री तक सैकड़ों ज्ञापन सौंपे हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने योग प्रशिक्षकों से वादा किया था कि यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनती है तो आयुर्वेद योग प्रशिक्षकों के लिए फुल टाइम स्थायी पद सृजित किए जाएंगे, लेकिन सरकार बनने के बाद अब तक यह वादा पूरा नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि योग दिवस पर सरकार योग की उपलब्धियों का श्रेय लेती है, लेकिन योग को जन-जन तक पहुँचाने वाले प्रशिक्षकों के योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह सरकार की दोहरी नीति का प्रतीक है।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश नांगल ने कहा कि आज के महंगाई भरे दौर में अल्प मानदेय से घर खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है, लेकिन सरकार में योग प्रशिक्षकों के भविष्य को लेकर अभी भी अंधेरा बना हुआ है। धरना प्रदर्शन में लगभग आयुर्वेद विभाग के लगभग 1300 योग प्रशिक्षक सम्मिलित हुये।













