(दीपकराठौर)
बिजौलियाँ|स्मार्ट हलचल| उक्त कहावत को चरितार्थ करता हुआ व्यक्तित्व शिक्षक शंभू लाल का|जीवन में आए कठिन संघर्षों के बाद भी अपने दृढ़ निश्चयता पर अडिग रहते हुए शिक्षा जगत में दिए गए अपने योगदान के बाद सेवानिवृत्ति पर अपना धन रुपी खजाना विद्यालय के लिए खोल दिया|31 जनवरी को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बिजौलियाँ से सेवानिवृत हुए वरिष्ठ लैब सहायक शंभू लाल धाकड़ ने इसी विद्यालय में 1लाख 50 हजार के आर्थिक सहयोग से रसायन प्रयोगशाला का निर्माण करवाया| इसी के साथ तकरीबन कक्षा 1 से 12 तक के 650 बच्चों के लिए कृष्ण भोग का आयोजन कर, भोजन करवाया|
शंभू लाल द्वारा विद्यालय में 13 होनहार बच्चों को पांच -पांच रुपए नगद दिए साथ ही एक होनहार छात्रा खुशी कुमारी मीणा को कोचिंग के लिए ₹11हजार का आर्थिक सहयोग भी दिया|
शिक्षक शंभू लाल द्वारा इससे पूर्व काछोला विद्यालय में भी लगभग 25 होनहार विद्यार्थियों को पांच-पांच हजार रुपये नगद दिए, तथा वहां पर भी सभी विद्यार्थियों के लिए कृष्ण भोग का आयोजन किया गया |
इसी के साथ शिक्षक शंभू लाल द्वारा रतनगढ़ के समीप गौशाला में डेढ़ लाख रुपए का अनुदान भी दिया|
शिक्षक शंभू लाल का जन्म एक किसान परिवार में हुआ उनका जीवन हमेशा संघर्षों से भरा रहा| कोरोना काल में कैंसर रूपी गंभीर बीमारी से जंग जीत कर अपने जीवन को बचाया|
इन्होंने अपने जीवन काल में 31 वर्ष राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बिजौलियाँ में और 9 वर्ष काछोला अपनी अध्यापन रूपी सेवाएं दी | सेवानिवृत्ति पर आज सभी ने शिक्षक शंभू लाल को भावभीनी विदाई दी|













