पुरुषोत्तम मास में भक्ति का महासंगम: बैकुंठधाम सगतपुरिया में गूंजे जयकारे, रामचरितमानस पाठ और वैदिक अनुष्ठानों से आलोकित हुआ वातावरण

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी

पुरुषोत्तम अधिकमास की पावन बेला में निकटवर्ती सगतपुरिया ग्राम स्थित बैकुंठधाम इन दिनों श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति के अनुपम उत्सव का केंद्र बना हुआ है। रविवार से प्रारंभ हुआ श्रीरामचरितमानस पाठ, वैदिक अनुष्ठान और धार्मिक आयोजनों का यह विराट आयोजन पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का संचार कर रहा है। बैकुंठधाम परिसर में गूंजते वैदिक मंत्र, शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और श्रद्धालुओं के जयघोषों ने ऐसा दिव्य वातावरण निर्मित किया कि हर आगंतुक स्वयं को अध्यात्म की अनंत ऊर्जा से जुड़ा हुआ महसूस कर रहा है।

सोमवार को आयोजन के दूसरे दिन भी भक्ति का उत्साह चरम पर दिखाई दिया। साधकों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति से बैकुंठधाम परिसर जीवंत बना रहा। “जय जुझारजी”, “जय सगसजी” और “जय बैकुंठधाम” के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था की चमक और मन में प्रभु भक्ति का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

कार्यक्रम की शुरुआत गांव के आराध्य भगवान चारभुजानाथ के पावन बेवाण को गाजे-बाजे, भजन-कीर्तन और जयकारों के साथ बैकुंठधाम लाने से हुई। मार्गभर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया। भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु नाचते-गाते हुए बेवाण के साथ चले। बैकुंठधाम पहुंचने पर उपासक महेंद्र जोशी के नेतृत्व में भगवान की भव्य आरती और वंदना की गई। यह दृश्य श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत प्रतीक बन गया।

इसके बाद बैकुंठधाम में विराजमान सभी देवी-देवताओं का वैदिक रीति-रिवाजों के साथ अभिषेक किया गया। हवन-कुंड में मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, धर्म संरक्षण और जन-जन के सुख-समृद्धि की मंगलकामना की गई। पूरे परिसर को आकर्षक धार्मिक सजावट से सुसज्जित किया गया था, जिससे वातावरण और भी दिव्य एवं मनोहारी प्रतीत हो रहा था।

आयोजन के प्रमुख उपासक महेंद्र जोशी ने बताया कि पुरुषोत्तम मास में आयोजित यह श्रीरामचरितमानस पाठ भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नयन का विशेष अवसर है। उन्होंने बताया कि पाठ की पूर्णाहुति सोमवार प्रातः संपन्न होगी। इस अवसर पर विशेष भैरव यज्ञ एवं महाहवन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विश्व शांति, मानव कल्याण, रोग-शोक से मुक्ति और समाज में सुख-समृद्धि की कामना के साथ वैदिक मंत्रों द्वारा आहुतियां अर्पित की जाएंगी।

इस धार्मिक महायज्ञ को सफल बनाने में विद्वान आचार्यों और पंडितों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ज्योतिषाचार्य हरिशंकर शर्मा मंशा के मार्गदर्शन में पंडित कैलाश तिवाड़ी (गोगा का खेड़ा), पंडित जगदीश तिवाड़ी, पंडित सत्यनारायण जोशी, पंडित अभिषेक पाराशर, पंडित भगवान पुरोहित तथा पंडित हर्षित तिवाड़ी ने विभिन्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए। इनमें गणेश पूजन, षोडशोपचार पूजन, वास्तु पूजन, योगिनी पूजन, नवग्रह पूजन, रुद्राभिषेक, क्षेत्रपाल पूजन, सर्वतोभद्र मंडल स्थापना, रामायण मंडल पूजन, रामदरबार, हनुमानजी एवं चारभुजा भगवान का विशेष पूजन-अभिषेक शामिल रहा।

धार्मिक आयोजन में केवल सगतपुरिया ही नहीं, बल्कि कोटड़ी, आकोला, शाहपुरा और भीलवाड़ा सहित आसपास के अनेक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साधक एवं श्रद्धालु पहुंचे। पूरे दिन बैकुंठधाम में भक्ति, साधना और वैदिक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने रामचरितमानस के चौपाइयों का श्रवण कर आत्मिक शांति का अनुभव किया तथा धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर स्वयं को धन्य महसूस किया।

उल्लेखनीय है कि बैकुंठधाम सगतपुरिया आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन की अनेक पीड़ाओं से राहत का अनुभव होता है। यही कारण है कि प्रत्येक रविवार और प्रत्येक दूज तिथि को यहां नियमित रूप से आध्यात्मिक आयोजन, सत्संग एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर आत्मिक सुख प्राप्त करते हैं।

पुरुषोत्तम मास के इस पावन अवसर पर बैकुंठधाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब यह संदेश दे रहा है कि सनातन संस्कृति की जड़ें आज भी समाज में उतनी ही मजबूत हैं। जब भक्ति, सेवा और संस्कार एक साथ जुड़ते हैं, तब केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं होते, बल्कि समाज में सकारात्मकता, सद्भाव और आध्यात्मिक जागरण का नया प्रकाश भी फैलता है। बैकुंठधाम का यह आयोजन उसी दिव्य चेतना का जीवंत उदाहरण बनकर क्षेत्रवासियों के हृदय में आस्था की नई ज्योति प्रज्वलित कर रहा है।