पुनित चपलोत
भीलवाड़ा । भीलवाड़ा जिले के हमीरगढ़ तहसील अंतर्गत देवली गांव में जमीन धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव से मुलाकात कर न्याय की मांग की है। पीड़ितों का आरोप है कि स्थानीय पटवारी और भू-माफियाओं ने मिलीभगत कर मृत महिला के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि को हड़प लिया।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित सोहन लाल ने बताया कि देवली स्थित उनकी पैतृक कृषि भूमि पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। पूर्व में रामू देवी गाडरी नामक महिला ने कथित तौर पर जाति प्रमाण पत्र में हेरफेर कर (गरोडा से ओबीसी बनकर) अनुसूचित जाति (SC) की इस जमीन को अपने नाम करवा लिया था। इस धोखाधड़ी के खिलाफ पीड़ित परिवार एसडीएम न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है और मामला अभी अंतिम चरण में है।
मृतक के नाम पर फर्जीवाड़ा और पटवारी की भूमिका पर सवाल
सोहन लाल का आरोप है कि रामू देवी की मृत्यु 2 वर्ष पूर्व हो चुकी है। इसके बावजूद, उनके बेटे भगवान लाल गाडरी ने ग्राम पटवारी संदीप चौधरी के साथ मिलीभगत की। आरोप है कि बिना किसी वैध रजिस्ट्री या विक्रय दस्तावेज के, इस बेशकीमती जमीन का नामान्तरण राकेश सालवी के नाम खोल दिया गया।
दस्तावेजों में हेराफेरी का खुलासा
पीड़ित परिवार ने जब नामान्तरण और रजिस्ट्री की प्रतियां निकलवाईं, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रिकॉर्ड के अनुसार, इंतकाल में किसी अन्य व्यक्ति (देबी जाट) की रजिस्ट्री की कॉपी लगा रखी थी, जबकि जिस राकेश सालवी के नाम जमीन हस्तांतरित की गई, उसके नाम का कोई विक्रय दस्तावेज रिकॉर्ड में संलग्न ही नहीं था।
सोहन लाल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में तहसीलदार हमीरगढ़ और ग्राम सरपंच को भी लिखित शिकायत दी थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे परेशान होकर पूरे परिवार ने एसपी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और दोषियों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज बनाने व धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


