सुरज वर्मा
स्मार्ट हलचल।फुलिया कलां में करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अटल प्रगति पथ सड़क एक बार फिर विवादों में है। आरोप है कि सड़क का उद्घाटन होने से पहले ही कई स्थानों पर सड़क दरक गई थी। इसके बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की क्वालिटी कंट्रोल जांच समिति ने निरीक्षण कर निर्माण कार्य में अनियमितताएं पाई थीं।
अब स्थानीय लोगों का आरोप है कि
सड़क की गुणवत्ता सुधारने के बजाय दरकी हुई सड़क को पूरी तरह दोबारा बनाने की जगह केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों को तोड़कर पैबंद लगाकर लीपापोती की जा रही है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब करोड़ों रुपये जनता के टैक्स से खर्च किए गए हैं तो सड़क कुछ ही समय में क्यों टूट गई? यदि जांच में अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों, अभियंताओं और ठेकेदार के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई? यह सवाल आमजन के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
लोगों का कहना है कि
सड़क की केवल मरम्मत कर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, जबकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई कर पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क की गुणवत्ता की दोबारा तकनीकी जांच कराई जाए और यदि निर्माण में लापरवाही या भ्रष्टाचार सिद्ध होता है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है
जब सड़क उद्घाटन से पहले ही दरक गई थी तो गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है?
जांच समिति द्वारा अनियमितताएं मिलने के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या करोड़ों रुपये की परियोजना में सिर्फ पैबंद लगाकर मामले को खत्म किया जाएगा, या जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होगी?
यह मामला अब केवल सड़क की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी धन के पारदर्शी उपयोग से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है।
