Homeअंतर्राष्ट्रीयस्वीडन में कुरान क्यों जलाई गई ,तुर्की ने किया विरोध,जानिए, क्यों हो...

स्वीडन में कुरान क्यों जलाई गई ,तुर्की ने किया विरोध,जानिए, क्यों हो रहा विरोध प्रदर्शन

स्वीडन और तुर्की के बीच फिर दूरी बढ़ गई है. स्वीडन में विरोध प्रदर्शन के दौरान इस्लाम की पवित्र किताब कुरान को जलाने का मामला सामने आया है. तुर्की ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए इसे घिनौना काम बताया. तुर्की के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा है कि बार-बार चेतावनी जारी करने के बाद भी स्वीडन में मुस्लिमों को निशाना बनाना और मुस्लिम विरोधी काम को इजाजत देना पूरी तरह अस्वीकार्य है.

बयान में कहा गया है कि हालिया घटना बताती है कि कैसे यूरोप इस्लामोफ़ोबिया, नस्लवाद और भेदभाव के कारण “ख़तरे की घंटी” के स्तर तक पहुंच चुका है. स्वीडन की सरकार को इससे निपटने के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है. विरोध प्रदर्शन के बीच तुर्की ने स्वीडन के रक्षा मंत्री पाल जॉनसन का उनके देश में होने वाले दौरे को रद कर दिया है.

इसलिए प्रदर्शन हुआ मुस्लिम विरोधी

स्वीडन पिछले कुछ समय से नाटो सैन्य गठबंधन में शामिल होना चाहता है. तुर्की पहले से नाटो का सदस्य है और वो स्वीडन को इसमें शामिल करने के खिलाफ है. अगर कोई नाटो सदस्य किसी देश को इसका सदस्य बनने का करने का विरोध करता है तो उस पर रोक लगाई जा सकती है.

रूस और यूक्रेन की जंग शुरू होने पर स्वीडन और फिनलैंड ने नाटो सदस्य बनने के लिए कोशिशें शुरू की थीं, लेकिन तुर्की ने इसका विरोध किया. यही वजह है कि स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में तुर्की के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान स्टॉकहोम में तुर्की दूतावास के बाहर दक्षिणपंथी स्ट्राम कुर्स पार्टी के नेता रासमुस पैलुदान ने शनिवार को क़ुरान की एक प्रति जलाई. इस घटना के बाद सिर्फ तुर्की ही नहीं, कई इस्लामिक देशों ने विरोध जताया है.

सुधरने जा रहे सम्बंध और बिगड़ गए

प्रदर्शन से पहले स्वीडन के रक्षा मंत्री का तुर्की दौरा तय था. लेकिन हालिया घटना के बाद तुर्की ने उनका दौरा रद कर दिया. यह दौरा दोनों देशों के बीच सम्बंधों को बेहतर बनाने वाला बताया जा रहा था, लेकिन वर्तमान हालातों ने रिश्ते और खट्टे कर दिए हैं.

देश में बिगड़ते हालातों के बीच स्वीडन के प्रधानमंत्री का कहना है, राजधानी में तुर्की के राष्ट्रपति का पुतला उल्टा टांगने वाले लोग नाटो में शामिल होने की स्वीडन की कोशिशों को नुक़सान पहुंचा रहे हैं. तुर्की स्वीडन से लम्बे समय से ऐसे मामलों को रोकने के लिए कह रहा है. इसकी वजह भी है.

दरअसल, पिछले साल स्वीडन में कई रैलियां आयोजित की गई थीं जिनमें कुरान जलाने की धमकी दी गई थी. इसके बाद स्वीडन में पुलिस और गुस्साए धुर-दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक घटनाएं भी हुईं. अंतत: वहीं हुआ जिसका डर था.

विरोध में उतरे OIC और पाकिस्तान

तुर्की में हुई इस घटना के बाद कई इस्लामिक देशों ने इसका विरोध किया है. मुस्लिम देशों के संगठन OIC ने इसका विरोध जताया है. OIC के सेक्रेट्री जनरल हिसिन ब्राहिम ताहा नेका ने धुर दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं के कुरान जलाने की निंदा की है. इस मामले पर पाकिस्तान ने भी विरोध जताते हुए कहा, मूर्खतापूर्ण और भड़काऊ इस्लामोफोबिक हरकत ने करोड़ों मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम किया है. अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर ऐसी हरकतों को जायज नहीं ठहराया जा सकता. इस्लाम सभी धर्मों का सम्मान करता है और सभी को इसका सम्मान करना चाहिए.

कतर और सऊदी ने भी की निंदा

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इसकी कड़ी निंदा की है. मंत्रालय का कहना है, “सऊदी अरब बातचीत की अहमियत समझते हुए इसे आगे बढ़ाने में यक़ीन रखता है और नफ़रत, अतिवाद को ख़ारिज करता है.” इसके बाद क़तर ने भी स्वीडन को विरोध प्रदर्शन की इजाजत देने के लिए वहां के आधिकारियों की निंदा की है.

इस्लामी देशों के साथ चरमपंथी संगठनों ने जताया विरोध

स्टॉकहोम में कुरान जलाए जाने के बाद से एशिया से लेकर मध्य पूर्व के तमाम देशों में इस घटना का कड़ा विरोध किया जा रहा है.

टीआरटी वर्ल्ड ने तुर्की के रक्षा मंत्री मेवलत कावसोगलु के हवाले से कहा है कि ये एक ‘नफ़रती अपराध और नस्लवाद है जिसे विचारों की स्वतंत्रता नहीं कहा जा सकता.’

तुर्की के इन्फॉर्मेशन डायरेक्टर फहरत्तीन अल्तुन ने भी कहा है, ‘स्वीडन को तत्काल प्रभाव से तुर्की के ख़िलाफ़ नफ़रती भड़काऊ गतिविधियों के ख़िलाफ़ कदम उठाने के साथ इस्लाम विरोधी तत्वों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए.’

इसके साथ ही उन्होंने कहा है, ‘स्वीडन के नेताओं को अब इस वास्तविकता का सामना करना चाहिए कि आतंकी समूह तुर्की-स्वीडन रिश्तों में ज़हर घोलकर उसे नेटो सदस्य बनने से रोकना चाहते हैं.’

संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन समेत मिस्र ने भी इस घटना की निंदा की है.

बहरीन के विदेश मंत्रालय ने इसे एक भड़काऊ गतिविधि करार देने के साथ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों और सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है.

यही नहीं, यमन में हूती विद्रोहियों और लेबनान में हिजबुल्ला ने भी इस मामले में विरोध दर्ज कराया है.

हूती विद्रोहियों के नेतृत्व वाली सबा न्यूज़ एजेंसी ने बताया है कि हूती विद्रोहियों की प्रतिनिधि सभा ने कहा है कि अगर इस घटना की वजह से कुछ होता है तो उसके लिए स्वीडन की सरकार ज़िम्मेदार होगी.

ईरान समर्थित चरमपंथी संगठन हिज़बुल्ला ने मुस्लिम देशों और धार्मिक संस्थाओं से इस घटना की निंदा करने के लिए कहा है.

इसके साथ ही हिजबुल्ला ने इस तरह की गतिविधियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझ विकसित करने की बात कही है.

RELATED ARTICLES
- Advertisment -