चित्तौड़गढ़। स्मार्ट हलचल|गांधीनगर सेक्टर पाँच, स्थित आर.एन.टी. विधि महाविद्यालय में विधि तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए फौजदारी मूट कोर्ट का सफल आयोजन किया गया। यह सत्र का अंतिम मूट कोर्ट था,जिसका आयोजन डॉ.भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर के निर्धारित पाठ्यक्रमानुसार किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह, गंभीरता एवं विधिक समझ के साथ सक्रिय भागीदारी निभाई।
महाविद्यालय के समन्वयक गौरव त्यागी एवं उप-प्राचार्य डॉ. प्रभा भाटी ने बताया कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक विधिक प्रशिक्षण प्रदान करने तथा न्यायालयीन प्रक्रिया से प्रत्यक्ष रूप से अवगत कराने के उद्देश्य से इस मूट कोर्ट का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में न्यायिक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास एवं विधिक समझ विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।
विधि व्याख्याता जफ्फर हुसैन वैलिम ने कहा कि मूट कोर्ट विद्यार्थियों के लिए न्यायालय की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने का सर्वोत्तम माध्यम है। इससे उनमें तर्कशक्ति, विधिक विश्लेषण क्षमता, प्रभावी अभिव्यक्ति, जिरह कौशल तथा प्रस्तुतीकरण क्षमता का विकास होता है।
इस मूट कोर्ट की कार्यवाही देश के चर्चित “ आरुषि तलवार हत्या प्रकरण” पर आधारित थी। मामले के तथ्य के अनुसार वर्ष 2008 में नोएडा स्थित जलवायु विहार में आरुषि तलवार अपने निवास पर मृत पाई गई थी। प्रारंभिक स्तर पर संदेह घर के नौकर हेमराज पर जताया गया, किंतु अगले ही दिन उसका शव घर की छत से बरामद हुआ। इसके बाद यह मामला दोहरे हत्याकांड के रूप में सामने आया और राष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत चर्चित बन गया।
मामले की विवेचना के दौरान परिस्थितिजन्य साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक विश्लेषण, घटनास्थल की स्थिति, कॉल डिटेल तथा अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। अभियोजन पक्ष का कथन था कि घटना घर के भीतर हुई तथा उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं, जबकि बचाव पक्ष ने जांच की प्रक्रिया, साक्ष्यों के संरक्षण, विवेचना की निष्पक्षता तथा संदेह के लाभ के आधार पर अपना पक्ष प्रस्तुत किया। यही कारण रहा कि यह मामला विधिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण एवं अध्ययन योग्य माना जाता है। मूट कोर्ट में विद्यार्थियों ने विभिन्न न्यायालयीन भूमिकाएँ निभाईं।विभिन्न न्यायाधीशगण की भूमिका में क्रमशः तोशिबा खान, लक्षिता खटीक,सीमा मेनारिया,अभियोजन अधिवक्ता की भूमिका में क्रमशः देवेन्द्र सिंह, स्नेहा सुथार, बदरुन्निशा, गणेश तथा अभियुक्त पक्ष अधिवक्ता की भूमिका में क्रमशःअर्चना वर्मा, विद्या मालवीय, मुकेश रैगर, आयशा हुसैन रहे।
इसी प्रकार चिकित्सा अधिकारी की भूमिका में अमरीन खान,
फॉरेंसिक साइंटिस्ट की भूमिका में हर्षवर्धन सिंह चौहान,
तथा पुलिस अधिकारी / जांच अधिकारी की भूमिका में दीपक शर्मा, मृतका के पिता और आरोपी की भूमिका मोहम्मद हमजा, मृतका की माता और आरोपी की भूमिका कन्या धाकड़ ने अपने-अपने पात्रों का प्रभावशाली निर्वहन किया।
रीडर की भूमिका अंशुल,
स्टेनोग्राफर की भूमिका राधा
ने निभाई।
विद्यार्थियों ने तथ्यों, साक्ष्यों एवं विधिक प्रावधानों के आधार पर अपने-अपने पक्ष को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान जिरह, तर्क-वितर्क, विधिक विश्लेषण, साक्ष्य परीक्षण एवं न्यायालयीन शिष्टाचार का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला, जिससे यह आयोजन अत्यंत जीवंत, शिक्षाप्रद एवं प्रभावशाली बन गया। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता बी.एल. पोखरना सहित विधि सहायक आचार्य डॉ. प्रियंका शर्मा, सोनू कुमार मेघवंशी, ललित कुमार मीणा,डॉ.अनिल कुमार एवं दीपक शर्मा उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों के तर्कों एवं प्रस्तुतिकरण की सराहना करते हुए आवश्यक विधिक मार्गदर्शन प्रदान किया। मूट कोर्ट आयोजन में विधि व्याख्याता जमीर आलम,अमित कोहली, गजेंद्र जोशी, मेहा दाड, सोनिया राजौरा सहित अन्य व्याख्यातागण का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय आयोजन समिति द्वारा सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी गई तथा उपस्थित अतिथियों, प्राध्यापकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
