एजाज़ अहमद उस्मानी
मेड़ता रोड।स्मार्ट हलचल|शहर के बाइपास रेलवे स्टेशन के समीप स्थित रेलवे फाटक संख्या सी-99 ए शुक्रवार को करीब एक घंटे तक बंद रहने से यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। अचानक लंबे समय तक फाटक बंद रहने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। तेज धूप और उमस के बीच लोग अपने वाहनों में बैठे फाटक खुलने का इंतजार करते रहे, जिसके कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फाटक बंद रहने का कारण लोको पायलट और गार्ड के बक्से बदलने की प्रक्रिया रही। बताया जा रहा है कि ट्रेन के ठहराव के दौरान यह तकनीकी प्रक्रिया पूरी की गई, लेकिन इस दौरान रेलवे फाटक को लंबे समय तक बंद रखा गया। परिणामस्वरूप, सैकड़ों दोपहिया और चारपहिया वाहन दोनों ओर फंस गए। कुछ वाहन चालक वैकल्पिक रास्तों की तलाश में कच्चे मार्गों से निकलते दिखाई दिए, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रही।
*स्कूल बसें और मरीज भी फंसे*
फाटक बंद रहने से सबसे अधिक परेशानी स्कूल से आने वाले बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और मरीजों को हुई। कुछ स्कूल बसें भी जाम में फंस गईं, जिससे बच्चे समय पर घर नहीं पहुंच सके। वहीं, स्थानीय लोगों ने बताया कि एक-दो निजी वाहन मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए भी जाम में फंसे रहे। हालांकि कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई, लेकिन स्थिति चिंताजनक बनी रही।
*ग्रामीणों में रोष, उठी वैकल्पिक व्यवस्था की मांग*
स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों ने रेलवे प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई। उनका कहना है कि लोको पायलट व गार्ड के बक्से बदलने का कार्य रेलवे फाटक पर करने के बजाय स्टेशन परिसर के भीतर या किसी अन्य निर्धारित स्थान पर किया जाना चाहिए। फाटक लंबे समय तक बंद रखने से आमजन को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है।
ग्रामीणों ने कहा कि यह मार्ग शहर और आसपास के गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। ऐसे में यदि फाटक एक घंटे तक बंद रहता है, तो दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा बनी तो वे रेलवे प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
*आपातकालीन स्थिति में बढ़ सकता है खतरा*
स्थानीय नागरिकों ने यह भी चिंता जताई कि यदि इस दौरान कोई गंभीर आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो जाती, जैसे एंबुलेंस को अस्पताल पहुंचना हो या किसी गर्भवती महिला को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता हो, तो बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। लंबे समय तक फाटक बंद रहने से जान-माल का जोखिम भी बढ़ जाता है।रेलवे प्रशासन से समाधान की अपेक्षा घटना के बाद क्षेत्रवासियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी तकनीकी प्रक्रियाओं के दौरान फाटक को अधिक समय तक बंद न रखा जाए। यदि आवश्यक हो तो ट्रैफिक प्रबंधन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए या पहले से सूचना जारी की जाए, ताकि आमजन को असुविधा न हो।फिलहाल इस मामले में रेलवे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेकर शीघ्र समाधान करेगा।










