खून से लिखा पत्र, ‘मेडम हमारी सेवाएं बहाल करो’: मेडिकल कॉलेज में तीसरे दिन भी धरने पर डटे नर्सिंगकर्मी, लिखित आदेश तक आंदोलन की चेतावनी

पुनित चपलोत
भीलवाड़ा। स्मार्ट हलचल|राजमाता विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज में भर्ती आदेश निरस्त किए जाने के विरोध में नर्सिंगकर्मियों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। गुरुवार को आक्रोशित नर्सिंगकर्मियों ने कॉलेज की प्राचार्य के नाम अपने ही खून से पत्र लिखकर सेवा बहाली की गुहार लगाई। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक सेवा बहाली का लिखित आदेश जारी नहीं होता, उनका धरना जारी रहेगा।दरअसल, मेडिकल कॉलेज में सरकार की ओर से 144 नए पद स्वीकृत किए जाने के बाद पूर्व में कार्यरत प्लेसमेंट एजेंसी के 48 संविदा कर्मियों को हटा दिया गया था। बाद में 109 अभ्यर्थियों के उपस्थित होने के बाद शेष रिक्त पदों पर पूर्व में हटाए गए 48 कार्मिकों में से आवश्यकतानुसार प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया।

स्थानीय विधायक और कॉलेज प्राचार्य के स्तर पर 35 पात्र संविदाकर्मियों की सूची तैयार कर प्लेसमेंट एजेंसी को सौंपी गई तथा 30 पदों पर नियुक्ति के निर्देश दिए गए। आरोप है कि ठेकेदार ने 30 में से केवल 17 पुराने कार्मिकों को नियुक्त किया, जबकि 13 पदों पर नए युवाओं को शामिल कर लिया। इसके बाद विधायक के हस्तक्षेप से कॉलेज प्रशासन ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी मानते हुए जॉइनिंग से ठीक पहले 14 अगस्त को भर्ती आदेश निरस्त कर दिया।

आदेश निरस्त होने के बाद से नर्सिंगकर्मी कॉलेज परिसर में खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे रातभर कॉलेज गेट पर गुजार रहे हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। पिछले दो माह से रोजगार नहीं होने के कारण उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

इधर, प्लेसमेंट एजेंसी मेसर्स मेवाड़ सिक्योरिटी सर्विसेज, उदयपुर के ठेकेदार हिमांशुल माथुर का तर्क है कि नए युवाओं को अवसर इसलिए दिया गया, क्योंकि पुराने कर्मचारियों को बोनस अंक मिल चुके हैं।

गुरुवार को खून से पत्र लिखकर नर्सिंगकर्मियों ने प्रशासन के सामने अपना विरोध दर्ज कराया। आंदोलनकारियों ने दो-टूक कहा कि सेवा बहाली का लिखित आदेश मिलने तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी भी दी गई है।