Homeराजस्थानअलवरचांद नजर आया: शुरू हुआ बरकतों और इबादतों का पवित्र महीना रमजान

चांद नजर आया: शुरू हुआ बरकतों और इबादतों का पवित्र महीना रमजान

एजाज़ अहमद उस्मानी

स्मार्ट हलचल|शहर में बुधवार को जैसे ही रमजान का चांद नजर आने की घोषणा हुई, मुस्लिम समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई। मस्जिदों से ऐलान होते ही लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद दी और पूरे इलाके में रौनक बढ़ गई। पवित्र महीना रमजान शुरू होते ही इबादत, रोज़ा और नेकियों का सिलसिला आरंभ हो गया है।रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना होता है, जिसे रहमत, मग़फिरत और निजात का महीना कहा जाता है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग रोज़ा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं। सुबह सहरी के साथ रोज़ा शुरू होता है और शाम को अज़ान के बाद इफ्तार के साथ खोला जाता है। मस्जिदों में पांच वक्त की नमाज़ के साथ-साथ विशेष तरावीह की नमाज़ का भी आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।मुस्लिम मोहल्लों में देर रात तक चहल-पहल देखने को मिल रही है। बाजारों में रौनक बढ़ गई है, खजूर, फल, सेवइयां और अन्य खाद्य पदार्थों की खरीदारी तेज हो गई है। बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी इस महीने की खास तैयारियों में जुटे नजर आ रहे हैं। घरों और मस्जिदों को रोशनी से सजाया जा रहा है, जिससे माहौल पूरी तरह इबादत और उत्साह से भर गया है।धार्मिक विद्वानों के अनुसार, रमजान का महीना आत्मशुद्धि, संयम और भाईचारे का संदेश देता है। इस महीने में जरूरतमंदों की मदद करना, जकात और फितरा अदा करना विशेष महत्व रखता है। माना जाता है कि इस पवित्र महीने में की गई इबादतों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
चांद के दीदार के साथ ही एक बार फिर से समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ है। आने वाले दिनों में मस्जिदों में इबादतों का सिलसिला जारी रहेगा और पूरा समुदाय अल्लाह की रहमतें हासिल करने में जुटा रहेगा।

*इंसानियत का पैगाम*

माहे रमजान की आमद पर मेड़ता सिटी के क़ाज़ी ए शहर मोहम्मद अकरम उस्मानी ने कहा कि रमजान इंसानियत, सब और परहेजगारी का महीना है, जो समाज में इंसानियत का पैगाम देता है। यह महीना नेकी की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।

*रोजे की फजीलत*

उन्होंने कहा कि माहे रमजान में रोजा इस्लाम के अहम अरकान में से एक है। रोजा सिर्फ भूख-प्यास से रुकना नहीं, बल्कि अपनी जुबान, निगाह और दिल को भी गुनाहों से बचाने का नाम है। रोजा इंसान को सब, आत्मसंयम और हमदर्दी की तालीम देता है। भूख-प्यास का एहसास गरीबों के दर्द को समझने में मदद करता है, जिससे समाज में सेवा और सहयोग की भावना मजबूत होती है। रमजान की रातों में अदा की जाने बाली तरावीह की नमाज खास अहमियत रखती है। मस्जिदों में पाक कुरआन की तिलावत के साथ तरावीह अदा की जाती है, जिससे ईमान में मजबूती और दिलों को सुकून मिलता है।

*मस्जिदों में व्यवस्थाएं*

रमजान के मद्देनजर शहर की मस्जिदों में साफ-सफाई, रोशनी, बुजू के पानी, पंखों और नमाजियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजामात किए जा रहे हैं। शहर क़ाज़ी ने समुदाय के लोगों से अपील की है कि वे इस मुबारक महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें, जरूरतमंदों की मदद करें, जकात व सद‌का अदा करें और शहर में अमन-ओ-अमान कायम रखने में प्रशासन का पूरा सहयोग करें।

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