ऐतिहासिक नगरी जुरहरा में धू-धू कर जला 52 फीट ऊंचा रावण का पुतला

बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश लेकर आया दशहरा, भव्य शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब
राम-रावण युद्ध की लीला ने मोहा मन, मेले में उमड़ी हजारों लोगों की भीड़; झूलों और सैकड़ों दुकानों पर रही रौनक

जुरहरा, जिला डीग। रेखचंद्र भारद्वाज।

स्मार्ट हलचल|ऐतिहासिक नगरी जुरहरा में मंगलवार को असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दशहरा पर्व हर्षोल्लास, उमंग और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कस्बे के अस्थायी दशहरा मैदान में 52 फीट ऊंचे रावण के विशाल पुतले का दहन किया गया। रावण का पुतला धू-धू कर जल उठा तो पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक और आकर्षक दृश्य को देखने के लिए जुरहरा कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों में दशहरा मेले को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।

दशहरा पर्व के अवसर पर पूरे कस्बे में उत्सव जैसा माहौल रहा। जगह-जगह लोगों की चहल-पहल, बाजारों में रौनक और मेले में उमड़ी भीड़ ने पर्व की खुशियों को और बढ़ा दिया। रावण दहन के साथ ही लोगों ने बुराई का त्याग कर सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश ग्रहण किया।

दर्जनों झांकियों और बैंड-बाजों के साथ निकली भव्य शोभायात्रा
दशहरा पर्व पर कस्बे में आकर्षक झांकियों और बैंड-बाजों से सुसज्जित भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा पुराने रामलीला मैदान से प्रारंभ होकर पुरानी पुलिस चौकी, चौपड़ा बाजार, मुख्य बाजार और बस स्टैंड होते हुए थाने के पास स्थित अस्थायी दशहरा मैदान पहुंची। शोभायात्रा के मार्ग में जगह-जगह लोगों की भीड़ नजर आई। आकर्षक झांकियों और धार्मिक प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया। शोभायात्रा के दौरान धार्मिक उत्साह और उल्लास का वातावरण बना रहा। झांकियों में रावण, सीता, राम-लक्ष्मण सहित कई अन्य झांकियां शामिल रही।

शोभायात्रा के दशहरा मैदान पहुंचने के बाद भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध की लीला का भव्य मंचन किया गया। राम-रावण युद्ध के प्रसंग ने दर्शकों को रामायण की याद दिला दी। अंत में रावण के विशाल पुतले का दहन किया गया। पुतले में आग लगते ही उपस्थित लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए और पूरा मैदान उत्साह से गूंज उठा।

सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल हैं जुरहरा की रामलीलाएं
जुरहरा की रामलीलाएं और दशहरा मेला धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतीक माने जाते हैं। यहां रामलीला और दशहरा के आयोजन में क्षेत्र के लोगों की भागीदारी कस्बे की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखती है। विभिन्न वर्गों के लोग मिल-जुलकर इस पर्व का आनंद लेते हैं, जिससे आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश प्रसारित होता है।

क्षेत्र में जुरहरा का दशहरा मेला सबसे बड़े मेलों में गिना जाता है। मेले में उमड़ी हजारों लोगों की भीड़ ने इसकी लोकप्रियता को दर्शाया। दूर-दराज के गांवों से आए लोगों ने मेले में घूमने, खरीदारी करने और धार्मिक आयोजन देखने का आनंद लिया।

सैकड़ों दुकानों पर रही रौनक, बच्चों ने झूलों का लिया आनंद
दशहरा मेले में सैकड़ों छोटी-बड़ी दुकानें सजाई गईं। खिलौनों, मिठाइयों, खान-पान की वस्तुओं और घरेलू सामान की दुकानों पर लोगों की चहल-पहल बनी रही। बच्चों के लिए लगाए गए विभिन्न प्रकार के झूले आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। बच्चों ने झूलों का आनंद लिया, वहीं परिवारों ने मेले में खरीदारी और खान-पान का लुत्फ उठाया।

मेले की रौनक और लोगों की भीड़ ने पूरे क्षेत्र को उत्सवी रंग में रंग दिया। शाम होते-होते दशहरा मैदान में लोगों की आवाजाही और बढ़ गई। धार्मिक आयोजन के साथ मनोरंजन और खरीदारी का संगम मेले को खास बनाता नजर आया।

सोमवार रात हुआ लक्ष्मण शक्ति सहित कई लीलाओं का मंचन
दशहरा पर्व से एक दिन पूर्व सोमवार की रात्रि को पुराने रामलीला मैदान में रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया गया। स्थानीय कलाकारों ने लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ वध, कुम्भकर्ण वध और अहिरावण वध की लीलाओं का जीवंत अभिनय प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को मंच पर साकार किया। देर रात तक दर्शक रामलीला का आनंद लेते रहे। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कस्बे की वर्षों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्थानीय कलाकारों ने निभाए विभिन्न पात्र
रामलीला में रावण की भूमिका गौरीशंकर तिवारी ने निभाई, जबकि मंदोदरी के पात्र में अखिल वशिष्ठ नजर आए। मेघनाथ की भूमिका तनुज शर्मा, कुम्भकर्ण की भूमिका सोनू प्रजापति और अहिरावण की भूमिका रवि तिवारी, सुषेण वैद्य की भूमिका डॉ सोहनलाल शर्मा ने निभाई। पंडा की भूमिका तुषार शर्मा व शिवहरि ने निभाई। वहीं कालनेमि के पात्र में अर्जुन सिंह मानवी, मकरध्वज की भूमिका राहुल साहू और मंत्री की भूमिका के.के. शर्मा ने अभिनय किया। रामचरित मानस का पाठ भगवानदास पाराशर, हारमोनियम वादन लक्ष्मीनारायण गौड़ व ढोलक वादन गोरधनलाल सैनी के द्वारा किया गया।

स्थानीय कलाकारों के अभिनय ने रामलीला को प्रभावशाली बनाया और दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।

बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश
जुरहरा में आयोजित दशहरा पर्व ने एक बार फिर भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की महत्ता को रेखांकित किया। रावण दहन केवल एक पुतले का दहन नहीं, बल्कि अहंकार, अन्याय, अधर्म और बुराइयों को त्यागने का प्रतीक है। भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर सत्य, मर्यादा, सद्भाव और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए ऐतिहासिक नगरी जुरहरा में दशहरा पर्व उत्साह और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

फोटो-01 जुरहरा में जलने के लिए तैयार रावण का पुतला

02 व 03- जुरहरा में निकाली गई शोभायात्रा में शामिल झांकिया

फोटो- 04 लक्ष्मण शक्ति की लीला का दृश्य