मेवाड़ विश्वविद्यालय में मान्यता विवाद के बीच हिंसक झड़प

गंगरार।स्मार्ट हलचल|मेवाड़ विश्वविद्यालय में एएनएम और जीएनएम नर्सिंग पाठ्यक्रम की मान्यता को लेकर चल रहा विवाद अब उग्र रूप ले चुका है। मंगलवार देर रात छात्र आंदोलन के बीच परिसर में दो गुटों के बीच झड़प, हंगामा और तोड़फोड़ की घटना हुई, जिसमें छह छात्र घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मेस में बवाल और तोड़फोड़
जानकारी के अनुसार, मान्यता की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहे आंदोलन के दौरान मंगलवार रात छात्रों के दो गुट आमने-सामने आ गए। विवाद बढ़ने पर मेस परिसर में हंगामा हुआ। कांच की खिड़कियां, गमले और अन्य सामान तोड़ दिए गए। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और परिसर में अतिरिक्त बल तैनात किया गया।
घटना में छह छात्र घायल हुए, जिन्हें तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
बुधवार सुबह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरिता सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। जिलेभर से पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक और उपनिरीक्षकों सहित लगभग 500 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात किया गया। अधिकारियों ने छात्रों से संवाद कर शांति बनाए रखने की अपील की।
दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज
घटना के बाद पुलिस ने दो प्रकरण दर्ज किए हैं।
पहला मामला: गंगरार निवासी राकेश पुत्र नंद गिरी ने शिकायत दी कि कुछ छात्रों ने मेस बंद कर अव्यवस्था फैलाई और माहौल तनावपूर्ण बनाया।
दूसरा मामला: रायबरेली निवासी छात्र अभिषेक सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ छात्रों ने उनके साथ मारपीट की, तोड़फोड़ की और सरिए से हमला किया।
दोनों मामलों में पुलिस ने जांच प्रारंभ कर दी है।
मान्यता को लेकर गहराता असंतोष
मूल विवाद नर्सिंग कोर्स (एएनएम और जीएनएम) की मान्यता को लेकर है। विश्वविद्यालय ने तीन वर्ष पूर्व मान्यता के लिए आवेदन किया था, जो अब तक सरकार स्तर पर लंबित है। छात्रों का कहना है कि उनके कोर्स की अवधि समाप्त होने में मात्र छह माह शेष हैं। यदि समय पर मान्यता और परीक्षा नहीं हुई तो उनका एक वर्ष व्यर्थ हो जाएगा।
अनशन पर बैठे छात्र-छात्राओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन जानबूझकर असल मुद्दे से ध्यान भटका रहा है। उनका कहना है कि छात्रों को दो गुटों में बांटकर “फूट डालो और राज करो” की नीति अपनाई जा रही है, ताकि मान्यता और डिग्री से जुड़े प्रश्न दब जाएं।
छात्रों ने आशंका जताई है कि यदि मान्यता नहीं मिली तो उनकी डिग्री का कोई मूल्य नहीं रहेगा और उनका भविष्य संकट में पड़ सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप कर मान्यता प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की है।
समझाइश और अस्थायी राहत
प्रशासनिक अधिकारियों ने अनशन कर रहे छात्रों को समझाकर भोजन करने का आग्रह किया। कुछ छात्रों ने पुलिस सुरक्षा में भोजन किया, जबकि कुछ ने अनशन जारी रखा।
तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए अन्य संकायों के कई छात्र घर लौट गए हैं। आगामी रमजान और होली को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को अस्थायी रूप से घर जाने की अनुमति दी है।
प्रबंधन और प्रशासन का पक्ष
विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि मान्यता प्रक्रिया सरकार स्तर पर लंबित है और उसे शीघ्र पूर्ण कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं जिला प्रशासन ने दावा किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
फिलहाल परिसर में पुलिस बल तैनात है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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