नशामुक्त राजस्थान के संकल्प को लेकर राष्ट्रवादी संत श्रीराम महाराज ने ANTF आईजी विकास कुमार से की मुलाकात

भरत देवड़वाल

जयपुर। स्मार्ट हलचल|टोंक जिले के निवाई उपखंड के कांटोली गांव स्थित महाभारतकालीन प्रसिद्ध मां भद्रकाली मंदिर के पीठाधीश्वर एवं नशा मुक्ति अभियान संचालक श्रीराम महाराज अघोरी ने राजस्थान को नशामुक्त बनाने के संकल्प को लेकर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के आईजी विकास कुमार से मुलाकात की।मुलाकात के दौरान अभियान को जन-जन तक पहुंचाने और युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने को लेकर विशेष चर्चा हुई। राम महाराज अघोरी ने प्रदेश में बढ़ते नशे के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। युवाओं को नशे से बचाने के लिए सामाजिक जागरूकता के साथ प्रशासन और पुलिस के प्रयासों को जनभागीदारी से जोड़ना जरूरी है।

श्री राम महाराज लंबे समय से नशा मुक्ति के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए अभियान चला रहे हैं। उनका प्रयास है कि युवाओं आनेवाली पीढ़ी को नशे से दूर रखकर शिक्षा, संस्कार, खेल और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान को नशामुक्त बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

आईजी विकास कुमार से चर्चा के दौरान नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने, युवाओं में जागरूकता बढ़ाने तथा नशे के विरुद्ध चल रहे अभियानों को सामाजिक संगठनों एवं संत समाज के सहयोग से और मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ।

श्रीराम महाराज ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। परिवार, समाज, धार्मिक संस्थाएं, युवा और प्रशासन एकजुट होकर प्रयास करें तो राजस्थान को नशामुक्त बनाने का संकल्प मजबूत होगा।

*नशे के खिलाफ विकास कुमार की मुहिम —*

आपको बता दें की राजस्थान में नशे के खिलाफ ANTF की कार्रवाई को आईजी विकास कुमार के नेतृत्व में लगातार धार मिली है। उनके निर्देशन में अफीम, डोडा-पोस्त, गांजा, स्मैक और सिंथेटिक ड्रग्स की बड़ी खेप बरामद की गई है। बड़े तस्करों और लंबे समय से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ अंतरराज्यीय नेटवर्क पर भी शिकंजा कसा गया है। अवैध अफीम की खेती को नष्ट करने से लेकर MD ड्रग तैयार करने वाली इकाइयों का भंडाफोड़ तक कार्रवाई की गई है। अभियान का फोकस केवल खेप पकड़ने तक नहीं, बल्कि स्रोत, सप्लायर और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर है।