ओम जैन
शंभूपुरा। स्मार्ट हलचल|चित्तौड़गढ़ जिले के राशमी उपखंड मुख्यालय पर पंचायत समिति से महज तीन सौ मीटर की दूरी पर बहने वाली जीवनदायिनी बनास नदी को स्थानीय जनप्रतिनिधि ने डंपिंग ग्राउंड बना कर रख दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि डंपिंग ग्राउंड तो महज एक बहाना है, लेकिन सत्यता तो यह है कि नदी के मुहाने पर अवैध कब्जा जमाना है। इस मामले को लेकर जब जिम्मेदार अधिकारियों से बात करनी चाही, तो ये अधिकारी फोन उठाने से परहेज करते हुए दिखाई दिए। सबसे बड़ी हास्यास्पद बात तो पटवारी की रही, जब उन्होंने नदी पेटे की जमीन को ही चारागाह भूमि बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया, लेकिन जब वास्तविकता बताई तो उन्होंने कागज चलाने की बात कह कर फोन बंद कर दिया। मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने मामले की जानकारी प्रशासन को भी दी, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण जिम्मेदार भी मौन बैठ गए। जानकारों की माने तो यह मामला अवैध खनन से भी जुड़ा हुआ है।
नदी में डंपिंग ग्राउंड!
राशमी उपखंड मुख्यालय पर बने पंचायत समिति भवन से महज 300 मीटर की दूरी पर बहने वाली बनास नदी पर स्थानीय जनप्रतिनिधि ने अपनी मनमर्जी करते हुए नदी में ही डंपिंग ग्राउंड बना डाला है। जहाँ पर कचरे के ढेर लग रहे है। क्षेत्र के बड़े जनप्रतिनिधियों की शह पर चल रहे अवैध बजरी खनन से पहले ही छलनी हो चुकी बनास में यह डंपिंग ग्राउंड कोढ़ में खुजली का काम कर रहा है। नदी पेटे को खोद कर निर्माण कार्य करवा कर वहाँ लोहे के एंगल भी लगवा कर ग्राउंड बनाया गया है। मामले से जानकारों का कहना है कि यह सब कार्य एक तरह से नदी पर अतिक्रमण करने का ही प्रयास हो रहा है। जिसमे स्थानीय प्रशासक की शह पर किया जा रहा है।
अधिकारियों का फोन से परहेज
नदी में बन रहे डंपिंग ग्राउंड को लेकर जब स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने फोन उठाने तक की आवश्यकता महसूस नही की। करीब तीन चार बार कोशिश करने के बाद बड़े प्रशासनिक अधिकारी से बात हुई भी, लेकिन उन्होंने भी जानकारी नही होने की बात कह कर मामला दिखवाने की बात कह कर फोन रख दिया।
पटवारी का अजीब तर्क
राशमी पटवार मंडल के पटवारी
चंद्रदीप से इस बाबत जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने नदी पेटे को ही चरनोट भूमि बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया। लेकिन जब नदी और चरनोट भूमि के सम्बंध को पूछा तो, उन्होंने झल्लाते हुए मंगलवार को कागज चलाने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया।
अवैध खनन और अतिक्रमण से जुड़ा हुआ है मामला
बनास नदी के मुहाने पर डंपिंग ग्राउंड बनाने के पीछे असली वजह जानने की कोशिश की तो यह मामला अतिक्रमण और अवैध खनन से जुड़ा हुआ दिखाई दिया। इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधि को बड़े जनप्रतिनिधियों से संरक्षण मिला हुआ होने की बात सामने आई, लेकिन कोई भी खुल कर कुछ भी कहने से बचते रहे।


