रोड पर डामर कम, गड्ढे ज्यादा, मेले से पहले नहीं सुधरी तो होगा बड़ा हादसा, भक्तों ने कहा – कम से कम रास्ता तो ठीक कर दो
(बद्री लाल माली)
गुरला:-स्मार्ट हलचल|भीलवाड़ा जिले की धार्मिक नगरी के रूप में पहचान रखने वाले दो प्रमुख आस्था केंद्र – एक बासड़ा देवनारायण भगवान धाम*और दूसरा ओझाघर महादेव धाम। दोनों ही धामों पर साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। लेकिन इन दोनों धामों को शहर और नेशनल हाईवे से जोड़ने वाली मुख्य सड़क की हालत इतनी ज्यादा खस्ताहाल हो चुकी है कि अब यह सड़क आस्था के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। हालात यह हैं कि इस सड़क पर चलने से ही लोग डरने लगे हैं।मौके की तस्वीर देखिए, रूह कांप जाएगी पूरे भ्रष्टाचार और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रही है। फोटो में साफ दिख रहा है कि सड़क का आधा हिस्सा पूरी तरह से उखड़ चुका है। डामर नाम की चीज खत्म हो चुकी है, केवल बजरी और मिट्टी बची है। सड़क के बीचों-बीच 2 फीट गहरा और 4 फीट लंबा गड्ढा बन गया है, जो किसी भी दोपहिया वाहन को गिराने के लिए काफी है। सड़क के दोनों किनारे टूट कर बिखर गए हैं। अगर कोई अनजान व्यक्ति रात में इस रोड पर आ जाए तो उसका हादसा होना तय है।
साल में दो बार भरता है बासड़ा में लाखों का मेला, फिर भी नहीं जागा प्रशासन
स्थानीय पुजारी और ग्रामीणों ने बताया कि बासड़ा देवनारायण धाम में साल में दो बार विशाल लक्खी मेला भरता है। भादवा सुदी छठ और माघ के महीने में यहां लाखों की संख्या में गुर्जर समाज सहित सर्व समाज के लोग भगवान देवनारायण के दर्शन करने आते हैं। मेले में राजस्थान ही नहीं, मध्यप्रदेश, हरियाणा, उत्तरप्रदेश तक से श्रद्धालु आते हैं। मेले के दौरान इस रोड पर पैर रखने की जगह नहीं होती। ट्रैक्टर-ट्रॉलियां, ऊंट गाड़ियां, बाइक और पैदल यात्रियों का सैलाब उमड़ता है। लेकिन रोड की ऐसी दुर्दशा है कि मेले में आने वाले लाखों भक्तों को इसी टूटी-फूटी सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे गड्ढों में गिरकर चोटिल होते हैं। कई बार एम्बुलेंस तक को निकलने में घंटों लग जाते हैं।
ओझाघर महादेव : श्रावण में 30 दिन लगता है भक्तों का तांता वहीं दूसरी तरफ ओझाघर महादेव मंदिर भी जिले का प्राचीन और चमत्कारी मंदिर है। श्रावण मास में पूरे 30 दिन यहां मेले जैसा माहौल रहता है। प्रतिदिन हजारों कांवड़िए और शिव भक्त जलाभिषेक करने आते हैं। हर सोमवार को तो यहां पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है इतनी भीड़ होती है।
ओझाघर और बासड़ा दोनों धामों के लिए यही एकमात्र मुख्य रोड है। दोनों जगह जाने के लिए श्रद्धालुओं को इसी खस्ताहाल रोड से गुजरना पड़ता है। हर शनिवार-रविवार को भी बासड़ा देवनारायण पर हजारों लोग आते हैं, क्योंकि शनिवार-रविवार को यहां विशेष पूजा होती है।
PWD की कार्यशैली पर उठ रहे हैं सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह रोड PWD के अधीन है और हर साल इसके मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपए कागजों में खर्च दिखाया जाता है, तो फिर रोड की हालत ऐसी क्यों है? ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने घटिया सामग्री का उपयोग कर सड़क बनाई थी, जो एक ही बरसात में उखड़ गई।
इस रोड की कोई मरम्मत नहीं हुई है। ग्रामीणों ने कई बार PWD के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिया, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। अधिकारी मौके पर आते भी हैं तो सिर्फ फोटो खींच कर चले जाते हैं। भक्तों का दर्द – क्या आस्था की कोई कीमत नहीं बासड़ा देव नारायण मंदिर मेला कमेटी अध्यक्ष उम्मेदसिंह राणावत ने बताया कि जब नेताओं को वोट चाहिए होते हैं तो वे इसी रोड से होकर मंदिर में दर्शन करने आते हैं और बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई भी इस रोड की सुध नहीं लेता।बासड़ा वार्ड पंच गोविंद राणावत व रामेश्वर लाल गुर्जर भक्तों ने कहा कि हम सरकार से सोना-चांदी नहीं मांग रहे, हम सिर्फ चलने लायक सड़क मांग रहे हैं। अगर समय रहते इस रोड को ठीक नहीं किया गया तो आने वाले भादवा के मेले में कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी PWD विभाग और प्रशासन की होगी।
प्रशासन से मांग समस्त ग्रामवासियों, देवनारायण मंडल, शिव भक्त मंडल और व्यापार मंडल बासड़ा ने जिला कलेक्टर भीलवाड़ा, PWD अधीक्षण अभियंता और उपखंड अधिकारी से जोरदार मांग की है कि .बासड़ा देवनारायण और ओझाघर महादेव जाने वाली मुख्य सड़क का तुरंत सर्वे करवाया जाए। आने वाले मेले से पहले इस रोड का पूरा डामरीकरण कर गड्ढे भरे जाएं।. मेले के दौरान इस रोड पर लाइट और सुरक्षा व्यवस्था की जाए।