एजाज़ अहमद उस्मानी
स्मार्ट हलचल|राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) द्वारा जोधपुर से पीपाड़, बोरुंदा और मेड़ता मार्ग पर बस सेवाएं अचानक बंद किए जाने से ग्रामीण अंचलों में परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। वर्षों से संचालित इन रूटों पर बसों का संचालन ठप होने से आमजन, विद्यार्थी और कामकाजी लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग मजबूरन महंगे निजी साधनों का सहारा ले रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पीपाड़ क्षेत्र के स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं को सुबह-शाम घंटों बसों का इंतजार करना पड़ता है। कई बार बसें निर्धारित समय पर नहीं पहुंचतीं या सेवा पूरी तरह बंद रहती है। बोर्ड परीक्षाओं के दौरान भी छात्रों को आवागमन में गंभीर दिक्कतें उठानी पड़ीं।
बोरुंदा से बिलाड़ा रूट पर तो पिछले एक वर्ष से अधिक समय से बस सेवा बंद है। पहले इस मार्ग पर प्रतिदिन तीन फेरे लगाए जाते थे, लेकिन अब सेवा पूरी तरह बंद होने से ग्रामीणों, सरकारी कर्मचारियों और मजदूरों के लिए शाम को गांव लौटना चुनौती बन गया है। बोरुंदा, पटेल नगर, हरियाढाणा और रणसीगांव जैसे क्षेत्रों से बिलाड़ा तहसील मुख्यालय तक पहुंचना कठिन हो गया है।
बस सेवाओं में कटौती से यात्रियों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा है। निजी बस संचालक और कार चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं, जिससे सुरक्षा और शोषण की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवहन बाधित होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
जोधपुर डिपो के आगार प्रबंधक उमेद सिंह ने बसों, चालकों और परिचालकों की कमी को इसका मुख्य कारण बताया है। उनका कहना है कि संसाधन उपलब्ध होते ही ग्रामीण रूटों पर सेवाएं पुनः बहाल कर दी जाएंगी।
ग्राम पंचायत बोरुंदा की प्रशासक संतोष कंवर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पीपाड़–बोरुंदा–मेड़ता रूट पर बसें शीघ्र शुरू नहीं की गईं तो धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं पूर्व मंडल सदस्य भंवराराम मेघवाल ने भी रोडवेज प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में पुरानी समय-सारिणी की बहाली, बसों की संख्या में वृद्धि और प्रबंधन की मनमानी पर रोक शामिल है।










