विशिष्ट न्यायाधीश बालकृष्ण मिश्र बोले— यह न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर हस्तक्षेप या बड़ी साजिश? दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई
भीलवाड़|स्मार्ट हलचल|पोक्सो कोर्ट संख्या (1) के विशिष्ट न्यायाधीश बालकृष्ण मिश्र ने आज एक मामले में डीएनए सैंपल से छेड़छाड़ की आशंका को गंभीर मानते हुए पुलिस अधीक्षक को गहन जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने अभियुक्त को बरी करते हुए सवाल उठाया कि जब सैंपल सही तरीके से भेजे गए थे, तो रिपोर्ट में ऐसा असंभव परिणाम कैसे आया?
विशिष्ट लोक अभियोजक धर्मवीर सिंह कानावत ने बताया कि प्रकरण में पीड़िता, उसके माता-पिता और भ्रूण के सैंपल प्रयोगशाला भेजे गए थे, लेकिन एफएसएल रिपोर्ट में तीनों का डीएनए आपस में मेल नहीं खाने की बात सामने आई। सवाल यह है कि क्या यह तकनीकी भूल थी या सैंपल से छेड़छाड़ की गई? न्यायालय ने इसी संदेह के चलते विशेषज्ञ साक्षी को तलब किया। विशेषज्ञ ने बताया कि ऐसी स्थिति गलत सैंपलिंग या सैंपल बदले जाने के कारण भी हो सकती है।
न्यायालय ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि यह अत्यंत गंभीर विषय है, क्योंकि इससे न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा प्रश्नचिह्न लग जाता है। यदि ऐसी कारगुजारियों पर सख्ती से रोक नहीं लगाई गई तो क्या आमजन का न्याय व्यवस्था से विश्वास नहीं उठेगा? और क्या इससे सामाजिक अव्यवस्था की स्थिति पैदा नहीं होगी?
अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस मामले में यह पता लगाया जाए कि सैंपल से छेड़छाड़ किस स्तर पर हुई? और किसके द्वारा की गई? पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर दोषियों के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।
