आत्मज्ञान ही भगवान, अज्ञान ही जगत – आचार्यश्री रामदयाल महाराज

भीलवाड़ा, मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल|अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर एवं जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि आत्मज्ञान से बढ़कर संसार में कुछ भी नहीं है। अज्ञान ही जगत है और ज्ञान ही भगवान है। उन्होंने कहा कि हमारा मन ही संसार है और संसार को ही सब कुछ मान लेना अज्ञानता का प्रतीक है।
भीलवाड़ा में बुधवार को विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के अंतर्गत आयोजित दैनिक सत्संग में आचार्यश्री ने कहा कि शील, दया, संतोष रूपी धन और राम भजन की प्यास रखने से परम प्रकाश की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि जीवन में शील, संयम, दया, क्षमा और संतोष का होना आवश्यक है। जिसके पास क्षमा रूपी शस्त्र है, वही वास्तव में महान व्यक्ति होता है।
आचार्यश्री ने राम नाम एवं श्रीमद्भगवद्गीता की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गीता जीवन जीने की कला सिखाती है। परमात्मा की भक्ति के साथ संयम और संतोष का पालन करने से जीवन सफल बनता है। उन्होंने स्वामी रामचरणजी महाराज के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा कि राम के अतिरिक्त संसार में कोई सुखी नहीं है। मनुष्य दूसरों को स्वयं से अधिक सुखी समझता है, जबकि वास्तविक सुख माया में नहीं, बल्कि राम में है।

उन्होंने कहा कि मायावी संसार ही दुःख का कारण है, जबकि राम नाम अनंत सुख का स्रोत है। राम के बताए मार्ग पर चलकर और शास्त्रों के अनुसार मर्यादित जीवन जीने वाला व्यक्ति इस लोक और परलोक दोनों में सुख प्राप्त करता है। चातुर्मास आत्मजागृति और परमात्मा की भक्ति का श्रेष्ठ अवसर है।
इससे पूर्व रामस्नेही सम्प्रदाय के वरिष्ठ संत बड़े साध नरपत रामजी (उदयपुर) ने भी प्रवचन देकर धर्म का संदेश दिया। प्रवचन के उपरांत असावा परिवार, पथिक नगर, भीलवाड़ा के सदस्यों ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सुमन सोनी एवं मनीष विजयवर्गीय ने भजनों की प्रस्तुति दी।
सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 5 से 6 बजे तक रामधुनी, 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ तथा 9 से 10 बजे तक दैनिक सत्संग आयोजित किया जा रहा है। सूर्यास्त के समय होने वाली संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।