स्मार्ट हलचल|पावटा भोमिया मन्दिर महन्त श्रीश्री 1008 श्री सेवादास जी महाराज का शनिवार एकादशी की प्रातः वेला में देवलोक गमन हो गया। कस्बे के भोमिया मन्दिर से गाजे बाजे के साथ महाराज श्री की अन्तिम यात्रा निकाली गयी जो पावटा नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए पुन : भौमिया मन्दिर पहुंची जहाँ महाराज श्री का अन्तिम संस्कार संपूर्ण सामाजिक सम्मान के साथ किया गया।
संत सेवादास जी महाराज बाल्यकाल से अपने गुरु श्री विश्राम दास जी के अनुसरण में भौमिया मन्दिर मे पूजा अर्चना की जिम्मेदारी सम्भाले हुए है। इससे पूर्व संत सेवादास जी के गुरु श्री विश्राम दास जी महाराज ने लगभग 75 वर्षो तक मन्दिर की सेवा पूजा की 16 फरवरी 2007 को श्री विश्राम दास जी महाराज के देवलोक गमन के पश्चात 19 मार्च 2007 को पाँचो मण्डलों, सत्ताइसा मंडल के सभी संत तथा ग्राम जनता पावटा की मौजूदगी में श्री सेवादास जी महाराज की चादरपोशी कर मन्दिर की पूजा – अर्चना और बगीची के पेड पौधों की देखरेख सब प्रकार से देखरेख करते हुए मन्दिर की सम्पूर्ण जिम्मेदारी संत सेवादास जी महाराज करते आये है । मन्दिर में विभिन्न आयोजन करवाए । ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए बताया संत सेवादास जी बहुत ही सरल एवं संतोषी स्वभाव के संत थे।
महाराज श्री की अन्तिम यात्रा में सताईसा मण्डल अध्यक्ष प्रतिनिधि कृष्ण दास जी महाराज, संत मोहनदास जी महाराज, पावटा पंच गद्दी संत राधामोहन दास जी महाराज, पुरुषोत्तम दास जी महाराज पौद्यार दास मन्दिर, भगवतदास जी महाराज गूजेडा मन्दिर, गुरुदास जी प्रागपुरा, सांवरमल जी झीडाका बालाजी, रामदास जी कुण्डा, खडीपुर भीलवाडा राजारामदास जी, रामरतन दास जी चतरभुज, प्रेमदासजी बावडी (टसकोला ), गोकुलदास जी बावडी, बिहारी दास जी महाराज प्रतिनिधि करतारदास तथा उनकी शिष्या मीरा बाई,ज्ञानदास जी महाराज बडनगर, भरतदास जी महाराज अयोध्या तथा बडी संख्या ग्रामीण उपस्थित रहे। भरतदास जी धाम टोरडा बगीची मन्दिर महन्त मंगलदास जी महाराज की देखरेख में अन्तिम संस्कार विधि का कार्य समपन हुआ |













