संजय चौरसिया
हरनावदाशाहजी।स्मार्ट हलचल|मुस्लिम समुदाय में मंगलवार को इबादत, रहमत और मगफिरत की मुकद्दस रात शब-ए-बारात अकीदत व एहतराम के साथ मनाई जाएगी। इस मौके पर अकीदतमंद रातभर जागकर खुदा की बारगाह में इबादत करेंगे और अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली, तरक्की व आपसी भाईचारे की दुआ करेंगे।
खिदमतगार कमेटी के मेंबर आशु मंसूरी ने बताया कि शाबान माह की 15वीं रात शब-ए-बारात को मुस्लिम अकीदतमंद कुरान-ए-पाक की तिलावत, नफिल व तहज्जुद नमाज और इबादतों में मशगूल रहेंगे। इस रात मोमिन अपने गुनाहों से तौबा कर अल्लाह की रहमत हासिल करने की दुआ करते हैं।
अकीदतमंद कब्रिस्तान जाकर अपने बुजुर्गों के लिए दुरूद-ए-फातिहा पढ़ेंगे और उनकी मगफिरत की दुआ करेंगे। उन्होंने बताया कि रमजान की तरह ही माह-ए-शाबान भी बेहद पाक और मुबारक माना जाता है। इस रात रहमत के फरिश्ते जमीन पर उतरते हैं और इंसानों के अमाल अल्लाह की बारगाह में पेश होते हैं।
इमाम हाफिज इकरार अहमद ने कहा कि शब-ए-बारात इबादत और मगफिरत की रात है, जिसमें अल्लाह अपने बंदों के लिए रहमत के दरवाजे खोल देता है। इस रात दोजख से निजात मिलती है और गुनाहों की माफी अता होती है। शब-ए-बारात से रुहानी साल की शुरुआत मानी जाती है, जिसमें रिज्क, जिंदगी और मौत से जुड़े फैसले तय होते हैं।
उन्होंने अकीदतमंदों से अपील की कि शब-ए-बारात को सादगी से मनाएं, शोर-शराबे से बचें और इस पाक रात को अल्लाह के जिक्र, कुरान की तिलावत और नमाज में गुजारें। साथ ही अगले दिन का रोजा रखना भी बेहद फज़ीलत वाला बताया गया है।













