काछोला 17 जनवरी -स्मार्ट हलचल| शब-ए-मेराज यानी वह रात जब पैगंबर ए इस्लाम ने आसमानों का सफर तय कर अल्लाह से मुलाकात की थी। उसी रात अल्लाह ने पैगंबर ए इस्लाम को नमाज का तोहफा दिया। उसी रात पांच वक्त की नमाज फर्ज (अनिवार्य) की गई। मुस्लिमों को तोहफे की कद्र करनी चाहिए। पांच वक्त पाबंदी से नमाज अदा करें। यह बात काछोला जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मोहम्मद शाह आलम ने कही। वे जामा मस्जिद के जलसे को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अरबी महीने रजब की 27वीं रात को अल्लाह ने पैगंबर ए इस्लाम को अपना दीदार कराया। पैगंबर ए इस्लाम ने जमीन से आसमानों का सफर तय कर अल्लाह से मुलाकात की। इस रात को शब-ए-मेराज करते हैं। पैगंबर ए इस्लाम की अल्लाह से मुलाकात को मेराज कहा जाता है। जलसे के बाद देश प्रदेश गाँव में अमन,चैन, खुशहाली, तरक्की की दुआ की गई। वहीं शब-ए-मेराज पर मस्जिदों, खानकाहों, इमामबारगाहों में सजावट की गई। नजर-ओ-नियाज दिलाकर तबर्रूक बांटा गया। वही कस्बे में दिनभर शब-ए-मेराज को अदब और एहतराम के साथ मनाई गई। मस्जिद के साथ घरों में सारी रात इबादत में लोग मशगूल रहे। कुरआन-ए-पाक की तिलावत की गई। कजा नमाज, सलातुल तस्बीह व अन्य नफ्ल नमाजें पढ़ी गईं। मस्जिद व घरों में अल्लाह व पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जिक्र होता रहा। दुरूद ओ सलाम का नजराना पेश किया गया और हजरत निजामुद्दीन निजामी धोलाई वाले बाबा की दरगाह पर चादर शरीफ व अकीदत के फूल पेश किए।













