शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
आस्था, संकल्प और सेवा भाव से ओत-प्रोत एक अनूठा दृश्य उस समय देखने को मिला जब शाहपुरा के चार देवरों के उपासकों ने नगर की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना को लेकर शाहपुरा से चित्तौड़गढ़ स्थित कालका माता मंदिर तक पदयात्रा पूर्ण की। यह पदयात्रा न केवल धार्मिक यात्रा थी, बल्कि शाहपुरा की सामूहिक भावनाओं और आध्यात्मिक एकता का जीवंत प्रतीक बन गई। तीन दिनों तक निरंतर कठिन मार्गों, मौसम की चुनौतियों और शारीरिक थकान को पीछे छोड़ते हुए श्रद्धालुओं ने आस्था के बल पर यह यात्रा पूरी की। चतुर्थ दिन कालका माता मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से माता रानी के दर्शन किए, पूजा-अर्चना की और शाहपुरा नगर की खुशहाली, शांति व समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। मंदिर प्रांगण में गूंजती घंटियों और मंत्रोच्चार के बीच भक्तिभाव अपने चरम पर नजर आया।
इस पदयात्रा में शाहपुरा निवासी जितेंद्र सिंह नरूका, उदयलाल, देबीलाल तथा शिवपुरा निवासी छोटूलाल शामिल रहे। सभी उपासकों ने स्थानीय सगसजी के स्थान से पदयात्रा का शुभारंभ किया। यात्रा के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया, जलपान कराया और मंगलकामनाएं दीं। राह चलते लोगों के लिए यह पदयात्रा प्रेरणा का स्रोत बनी, जहां भक्ति के साथ अनुशासन और संकल्प की झलक साफ दिखाई दी।
कालका माता मंदिर में दर्शन के पश्चात चारों उपासकों ने पायलेट अजय चंचलानी के साथ झांतला माता और सांवरिया सेठ के भी दर्शन किए। वहां भी विधिवत पूजा कर आशीर्वाद लिया गया। श्रद्धालुओं ने कहा कि यह यात्रा केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि पूरे शाहपुरा के कल्याण की भावना से प्रेरित थी। माता रानी और सांवरिया सेठ के चरणों में नगरवासियों की सुख-शांति, व्यापारिक उन्नति और सामाजिक सौहार्द की कामना की गई। पदयात्रा की पूर्णता पर उपासकों के चेहरे पर संतोष और श्रद्धा की चमक साफ झलक रही थी। नगर में लौटने पर श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। शाहपुरा संवाद के लिए यह पदयात्रा उस गहरी आस्था की मिसाल बनी, जहां कदम-कदम पर भक्ति, विश्वास और नगर के प्रति प्रेम का भाव साथ चलता रहा।


