मूलचन्द पेसवानी
शाहपुरा। स्मार्ट हलचल।छोटे शहरों से निकलकर बड़े सपने सच करने की मिसाल अगर देखनी हो, तो शाहपुरा के सपूत Paresh Kumar Sharma का नाम गर्व से लिया जाएगा। शाहपुरा की मिट्टी में पले-बढ़े परेश शर्मा ने भारतीय वन सेवा में 36 वर्षों तक जंगलों, वन्यजीवों और पर्यावरण की रक्षा करते हुए जो संघर्ष, साहस और अनुभव अर्जित किए, वे अब पुस्तक ‘जंगलों में पदचिह्न—एक वन अधिकारी के संस्मरण’ के रूप में दुनिया के सामने आए हैं। खास बात यह है कि पुस्तक के लोकार्पण के कुछ ही समय बाद इसने ऑनलाइन मंच Amazon पर पर्यावरण एवं प्रकृति श्रेणी की शीर्ष 10 सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में जगह बनाकर नई उपलब्धि हासिल कर ली।
वर्तमान में Hyderabad में निवासरत परेश शर्मा मूलतः Shahpura के निवासी हैं। हैदराबाद में 24 जून को आयोजित एक सादगीपूर्ण लेकिन गरिमामय समारोह में उनकी पुस्तक का लोकार्पण हुआ। जैसे ही पुस्तक पाठकों तक पहुँची, इसकी चर्चा वन सेवा अधिकारियों, प्रशासनिक हलकों और पर्यावरण प्रेमियों के बीच तेजी से फैल गई।
यह किताब केवल संस्मरण नहीं, बल्कि संघर्ष, ईमानदारी और जुनून की जीवंत दास्तान है। पुस्तक में परेश शर्मा ने बचपन की यादों से लेकर प्रशासनिक सेवा के कठिन सफर तक हर पड़ाव को बेबाकी से दर्ज किया है। उन्होंने उन चुनौतियों को भी उजागर किया है, जिनका सामना उन्हें जंगलों में अवैध कटाई रोकने, वन संपदा की तस्करी पर लगाम लगाने, अतिक्रमण हटाने और वन्यजीवों की सुरक्षा के दौरान करना पड़ा। कई बार परिस्थितियाँ इतनी विकट रहीं कि जान का जोखिम भी उठाना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्य से कभी समझौता नहीं किया।
पुस्तक का सबसे मजबूत पक्ष इसकी सच्चाई और निर्भीकता है। इसमें सरकारी तंत्र की जमीनी हकीकत, फाइलों की जटिलता, निर्णय प्रक्रिया की चुनौतियाँ और एक ईमानदार अधिकारी के सामने आने वाले दबावों का बिना लाग-लपेट चित्रण किया गया है। यही कारण है कि पुस्तक को पढ़ने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे बेहद प्रेरक और मार्गदर्शक बताया है।
सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी Priyadarshi Dash ने पुस्तक को निडरता और स्पष्टवादिता का दस्तावेज बताया, जबकि Shripad Bhalerao ने इसे वन विभाग की कार्यप्रणाली समझने के लिए अनिवार्य पुस्तक कहा। वरिष्ठ प्रशासक B. P. Acharya ने इसे नई पीढ़ी के सिविल सेवा अभ्यर्थियों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
सेवानिवृत्त वन सेवा अधिकारी C. Madhukar Raj के अनुसार यह पुस्तक साबित करती है कि राजस्थान के अपेक्षाकृत छोटे नगर शाहपुरा का एक साधारण युवक भी अपनी मेहनत, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प से प्रशासनिक व्यवस्था के शीर्ष तक पहुँच सकता है।
शाहपुरा के लिए यह उपलब्धि किसी सम्मान से कम नहीं। एक ऐसे समय में, जब पर्यावरण संरक्षण वैश्विक चिंता का विषय है, शाहपुरा के बेटे ने अपने अनुभवों को शब्द देकर समाज को नई दिशा देने का प्रयास किया है। परेश शर्मा की यह सफलता शाहपुरा के युवाओं को साफ संदेश देती है—मंजिल बड़ी हो तो छोटे शहर कभी बाधा नहीं बनते, बल्कि वही सबसे मजबूत पहचान बनते हैं।
