शहर में ताबड़तोड़ कार्यवाही, लेकिन “दिया तले अंधेरा” बना चर्चा का विषय, नगर निगम के आस-पास फल-फ्रुट वालों का कब्जा, नालियां नदारद 

(राजेश जीनगर, भीलवाड़ा)
नगर निगम द्वारा शहर के बाजारों में अतिक्रमण हटाने को लेकर की जा रही बड़ी कार्रवाई के नाम पर मंगलवार को महावीर पार्क के निकट स्थित लाल बहादुर शास्त्री मार्केट में दुकानों के बाहर बनी नालियों के ऊपर से सीढ़ियां एवं फुटपाथ को जेसीबी की सहायता से हटाया गया। इस दौरान मौके पर दुकानदारों और राहगीरों की भारी भीड़ जमा रही। इस पूरी कार्रवाई से हुए नुकसान को लेकर दुकानदार प्रशासन को कोसते भी नजर आए। नगर निगम द्वारा शहर में अतिक्रमण हटाने और नालियां खोलने के नाम पर ‘ताबड़तोड़’ अभियान चलाया जा रहा है, जबकि नगर निगम परिसर के बाहर की नालियाँ पैक पड़ी है। पिछले कई दिनों से जेसीबी की मदद से शहर के व्यापारियों की दुकानों के बाहर बनी सीढ़ियों और प्लेटफॉर्म को मलबे में तब्दील किया जा रहा है, ओर तर्क दिया जा रहा है कि “नालियां खोलकर जल निकासी सुचारू करनी है और स्वच्छता को बनाना है। नगर निगम के ठीक बाहर की सड़क पर नालियों के पैक होने और जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में जबरदस्त जल भराव देखने को मिलता है। इससे जहाँ आवागमन तो बुरी तरह प्रभावित होता ही है, वहीं दूसरी ओर पानी के साथ आई गंदगी और कचरे से पर्यावरण और पूरा क्षेत्र भी दूषित होता है। महापौर के पदमुक्त होने और कलेक्टर के प्रशासक बनने के तुरंत बाद शहर में अतिक्रमण और स्वच्छता के नाम पर हो रही कार्रवाई को लेकर मिली झुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है। जहाँ एक ओर एक तबका इसे शहर के हित में सही ठहरा रहा है तो वहीं दूसरी ओर व्यापारी वर्ग इसे एक तरफा और बिना समाधान की पहल के सीधे कार्रवाई करार दे रहे हैं।

इधर, दिया तले अंधेरा…..
नगर निगम शहरी क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के नाम पर ताबड़तोड़ कार्यवाही भले ही कर रहा है, लेकिन उसी निगम के आस-पास अधिकारियों को अतिक्रमण नजर नहीं आ रहा है। अधिकारी क्वार्टर के बाहर और कोतवाली चौराहे पर फल फ्रुट के हाथठेले लगने अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है तो नगर निगम कोतवाली चौराहे के समीप ही मॉल के बाहर ताजा निर्माण कर नालियों को पुरी तरह से ढक दिया गया है, जो नगर निगम अधिकारियों को नजर नहीं आ रहा है या अनदेखा किया जा रहा है। वहीं दुसरी और लोगों की मानें तो शहर के सुचना केंद्र के आसपास भी किसी तरह की कार्यवाही नहीं किए जाने से नगर निगम के अधिकारी संदेह के दायरे में है।